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सर्जरी से पहले मानसिक और व्‍यावहारिक तैयारी से कम होता है ऑपरेशन का डर

फैशन और सौंदर्य By जया शुक्‍ला , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Sep 21, 2013
सर्जरी से पहले मानसिक और व्‍यावहारिक तैयारी से कम होता है ऑपरेशन का डर

सर्जरी से पहले मनोवैज्ञानिक तैयारी के जरिये ऑपरेशन का भय कम किया जा सकता है, और सर्जरी की जटिलताएं समझाई जा सकती हैं। सर्जरी से पहले किस तरह से आप अपने आपको तैयार कर सकते है पढ़ें हमारे इस लेख में।

Quick Bites
  • ऑपरेशन का भय कम किया जा सकता है, मनोवैज्ञानिक तैयारी के जरिये।
  • सर्जरी से पहले मरीज को सर्जरी के हर पहलू के बारे में बताना जरूरी।
  • मरीज को डॉक्टर के सामने अपनी सभी समस्याएं खुलकर रखनी चाहिए।
  • ऑपरेशन के दौरान सहज बने रहने में मदद मिलती है सकारात्मक सोच से।

सर्जरी से पहले कुछ समय पूर्व यू.एस. में तीन हजार रोगियों पर किए गए 34 शोधों की एक समीक्षा अमेरिकन जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुई।

preparation before surgery

शोधों में पाया गया कि जिन रोगियों को सर्जरी से पहले मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया, वे उनके मुकाबले औसतन दो दिन पहले हॉस्पिटल से बाहर आ गए, जिन्हें सामान्य प्री-सर्जिकल ट्रीटमेंट दिया गया। यह ऑडियो-विडियो साइकोथेरेपी सर्जरी से करीब दो हफ्ते पहले रोगियों को दी गई। जाहिर है कि मनोवैज्ञानिक तैयारी के जरिये ऑपरेशन का भय कम किया जा सकता है, और सर्जरी की जटिलताएं समझाई जा सकती हैं। आइए जानते है कि सर्जरी से पहले किस तरह की तैयारी की जाती है।


मानसिक तैयारी

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रमेश सरीन कहती हैं, कि  आजकल हर बडे अस्पताल में सर्जरी से पहले मरीज की साइको सिटिंग कराई जाती हैं। छोटी सर्जरी में इसकी जरूरत नहीं पडती, लेकिन ब्रेन, कैंसर, पेट, चेहरे, रीढ, सिर, हाथ-पैर, फेफडों की सर्जरी से पहले मरीज को सर्जरी के हर पहलू के बारे में बताना जरूरी होता है। ब्रेन का ऑपरेशन बहुत जटिल होता है। यदि सर्जन का हाथ दो मिलीमीटर भी इधर-उधर हो जाए तो पैरालिसिस अटैक हो सकता है। इसी तरह ब्रेस्ट कैंसर में रोगी को पहले से बताना पडता है कि ऑपरेशन के बाद उनका शरीर कैसा दिखेगा। कीमोथेरेपी के दौरान बाल झडेंगे तो स्कार्फ लगाना होगा। हर जटिल स्थिति में मरीज को काउंसलिंग देनी होती है। कई बार मरीज के मन में मौत का डर बढ़ जाता है। वह चिडचिडा हो जाता है, उसे अकेलापन घेर लेता है। साइकोथेरेपी से क्रोध, असहायता, भय व निराशा की इन्हीं भावनाओं को काबू करने की कोशिश की जाती है।

दिल्ली में ही कैनसपोर्ट नाम की संस्था चलाने वाली हरमाला गुप्ता कैंसर सर्वाइवर हैं और कैंसर से जूझ रहे रोगियों के लिए काउंसलिंग कर रही हैं। वह कहती हैं, मरीज की काउंसलिंग से कई बार आश्चर्यजनक नतीजे मिलते हैं। कैंसर को लोग सीधे मौत का आमंत्रण समझ लेते हैं। मुझे खुद भी ऐसी कई भावनात्मक परेशानियों से गुजरना पडा। कैंसर रोगी के दिल से भय कम करने के लिए हम उन्हें ऐसे लोगों से मिलवाते हैं, जो कैंसर से उबर चुके हैं, ताकि उन्हें मानसिक बल मिल सके।

सर्जरी के लिए खुद को तैयार करना ठीक वैसा ही है, जैसे किसी परीक्षा या प्रतियोगिता से पहले मानसिक-भावनात्मक तैयारी करना। किसी भी प्रतियोगिता या परीक्षा से पहले असुरक्षा, भय और बेचैनी जैसे लक्षण उभरते हैं और इनसे उबरने के लिए मानसिक-भावनात्मक और व्यावहारिक तैयारी की जाती है।

 

व्यावहारिक तैयारी

रॉकलैंड हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. पी.के. दवे कहते हैं, सर्जरी से पूर्व हमें यह भी देखना होता है कि अतीत में मरीज की कोई अन्य सर्जरी तो नहीं हुई है? डायबिटीज, थायरॉयड, ब्लड प्रेशर जैसे सभी टेस्ट कराए जाते हैं। रोगी के घर वालों को सर्जरी की जटिलताओं के बारे में बताना जरूरी होता है। जैसे, स्पाइन सर्जरी से पहले रोगी को यह बताना जरूरी है कि इसके सौ फीसदी नतीजे नहीं मिलते। कई बार इसमें पैरालिसिस या मौत तक का खतरा हो सकता है। इसका मकसद लोगों को डराना नहीं, उन्हें यथार्थ के बारे में बताना है। मरीज को भी डॉक्टर के सामने सभी समस्याएं खुलकर रखनी चाहिए। मन में कोई सवाल है तो वह भी अवश्य पूछना चाहिए।

सर्जरी से पहले सभी जरूरी जांच करवाना, एक्स-रे, एम.आर.आई. रिपो‌र्ट्स की फाइलिंग करना, सर्जरी और अस्पताल के अन्य खर्च की जानकारी लेना भी जरूरी है, ताकि सही समय पर व्यवस्था की जा सके। यदि मरीज की कोई मेडिक्लेम पॉलिसी है तो यह भी देखा जाता है कि जिस हॉस्पिटल में सर्जरी होने वाली है, वह इस पॉलिसी के अंतर्गत आता है या नहीं, कुल खर्च का कितना हिस्सा पॉलिसी से मिल सकता है, वह खर्च ऑपरेशन से पहले मिलेगा या बाद में, इसकी भी पूरी जानकारी लेना जरूरी है।

 

ध्यान दें

सर्जरी से पहले मानसिक तैयारी के साथ ही कुछ अन्य बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए। जैसे सर्जरी के एक हफ्ते पहले से संतुलित भोजन लेना चाहिए। सही खानपान व विटमिंस के सेवन से हीलिंग जल्दी होती है। यदि स्पाइन सर्जरी है तो वजन नियंत्रित रखना अनिवार्य है। वजन कम करने की यह कवायद फिजिशियन की मदद से ही कराई जानी चाहिए।

  • सर्दी-जुकाम, बुखार या किसी इन्फेक्शन में सर्जन को इसकी सूचना देनी चाहिए, ताकि सर्जरी की तारीख आगे खिसकाई जा सके।
  • सर्जरी से अमूमन 24 घंटे पहले हलका भोजन ही लिया जाता है। कुछ समय पूर्व पेय पदार्थ देना भी बंद कर दिया जाता है।
  • सर्जरी से पहले गहने न पहनें, मेकअप न करें। शरीर की स्वछता भी बहुत जरूरी है।
  • ऐसे लोगों से मिलें, जिनकी पहले सर्जरी हो चुकी है। बीमारी के बारे में किताबों, इंटरनेट या चिकित्सक से जानकारी लें।
  • योग-ध्यान, प्रार्थना के माध्यम से भय व तनाव को दूर किया जा सकता है। धैर्य न खोएं। सकारात्मक सोच रखें। इससे ऑपरेशन के दौरान सहज बने रहने में मदद मिलती है।

 

 

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Written by
जया शुक्‍ला
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागSep 21, 2013

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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