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ल्यूकीमिया के जोखिम कारक क्या हैं

कैंसर By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 24, 2013
ल्यूकीमिया के जोखिम कारक क्या हैं

धूम्रपान व केमिकल्स के संपर्क में रहने से शरीर में ल्यूकीमिया होने का खतरा होता है।

leukemia ke jokhim kaarak kya hai

ल्यूकीमिया ब्लड कैंसर का ही एक प्रकार है। ल्यूकीमिया होने के बाद कैंसररोधी सेल्स खून के बनने में रुकावट पैदा करने लगते हैं। ल्यूकीमिया का प्रभाव खून के साथ-साथ अस्थि मज्जा (बोन मैरो) पर भी होने लगता है। ल्यूकीमिया की वजह से मरीज को खून की कमी हो जाती है जिसके कारण चक्कर आना, कमजोरी होना, हड्डियों में दर्द होना, थकान लगना, उल्टी होना जैसे लक्षण शुरू हो जाते हैं। ल्यूकीमिया होने के प्रमुख कारणों का अभी भी पता नहीं चल पाया है लेकिन ल्यूकीमिया फैलने के कुछ जोखिम कारक हैं। जोखिम कारक वह होता है जो कि किसी भी मरीज में रोग को बढाने का प्रमुख कारण बनता है।

 

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ल्यूकीमिया के जोखिम कारक -

ल्यूकीमिया का इलाज होने पर -
कैंसर के मरीज जो कैंसर के इलाज के लिए पहले ही कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी करवा चुके होते हैं उनमें ल्यूकीमिया होने का खतरा होता सामान्य लोगों कि तुलना में ज्यादा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अक्स‍र इलाज के दौरान कैंसर के सेल्स पूरी तरह समाप्त नहीं होते हैं जो कि मरीज के लिए ल्यूकीमिया बढने का जोखिम कारक हो सकते हैं। 


आनुवांशिक बीमारी -
ल्यूकीमिया जन्मजात भी हो सकता है। जन्मजात शारीरिक असामान्यताएं भी ल्यूकीमिया को बढाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कुछ आनुवांशिक बीमारियां जैसे कि डाउन सिंड्रोम ल्यूकीमिया को बढने का कारण हो सकता है।



कुछ रक्त‍ विकार -
ऐसे लोग जिनको खून से संबंधित कुछ समस्याएं होती हैं उनको ल्यूकीमिया होने का जोखिम होता है। रक्त विकार जैसे माइलोडिस्‍प्‍लास्टिक सिंड्रोम से पीडि़त लोगों में ल्यूकीमिया का जोखिम हो सकता है।

 

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रेडिएशन के संपर्क में आना -
जो लोग उच्च स्तर वाले रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं उनमें ल्यूकीमिया होने का खतरा होता है। ऐसे लोग जो किसी परमाणु रिएक्टर में दुर्घटना के शिकार हुए हों और बच गए हों उनमें सामान्य या फैक्ट्रियों से निकलने वाले रेडिएशन के संपर्क में रहने वाले लोगों की तुलना में ल्यूकीमिया के होने का खतरा ज्यादा होता है।


केमिकल्स‍ के संपर्क में रहना -
कीटनाशकों और परफ्यूम में इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल्स के संपर्क में आने से ल्यूकीमिया का खतरा हो जाता है। केमिकल की फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोगों में भी ल्यूकीमिया होने का खतरा होता है।


धूम्रपान -
धूम्रपान करने से शरीर को बहुत नुकसान होता है। सिगरेट और तंबाकू में पाया जाने वाला निकोटीन शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं को समाप्त करता है। जिसके कारण धूम्रपान करने वालों में ल्यूकीमिया होने का खतरा बढ जाता है। धू्म्रपान माइलोजीनियस ल्यूकीमिया (ल्यूकीमिया का प्रकार) के खतरे को बढाता है।

[इसे भी पढ़े: ल्यूकीमिया की चिकित्सा के बाद क्या होता है]

 

परिवार में किसी को होने पर -
घर के किसी सदस्य में ल्यूकीमिया का निदान हुआ है तो परिवार के और सदस्यों को ल्यूकीमिया होने का खतरा होता है।



हालांकि, ल्यूकीमिया के इन प्रमुख जोखिम कारकों की वजह से भी कई ऐसे मरीज होते हैं जिनको ल्यूकीमिया नहीं होता है। इसके अलावा कुछ ऐसे मरीजों को भी ल्यूकीमिया हो जाता है जिनके लिए ये सब कारण उत्तरदायी नहीं होते हैं। ऐसे लोग जिनको ल्यूकीमिया होने का शक हो वे इसके उपचार के लिए किसी कुशल चिकित्सक से परामर्श अवश्यक ले लें।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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