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लिवर कैंसर की चिकित्‍सा

Updated at: Apr 15, 2013
कैंसर
Written by: Anubha TripathiPublished at: Apr 15, 2013
लिवर कैंसर की चिकित्‍सा

लिवर कैंसर की चिकित्‍सा : लिवर कैंसर की चिक्तिसा के लिए पढ़ें इसके उपचारों के बारे में। लिवर कैंसर के उपचार कितने प्रभावी हो सकते हैं जानें।

liver cancer ki chikitsaलिवर कैंसर की चिकित्सा कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे कैंसर का स्तर रोगी की उम्र और रोगी का सामान्य स्‍वास्‍थ्‍य। सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी लिवर कैंसर के प्रमुख उपचारो में से हैं। चिकित्सक रोगी के कैंसर की जांच करने के बाद ही यह निर्णय लेता है कि उसे कौन सी चिकित्सा देनी है।

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सामान्यत: ऐसे ट्यूमर को जो लिम्फ, नोड्स या दूसरे अंगों तक फैला नहीं हो उसे सर्जरी से निकाला जा सकता है। हालांकि इस शुरूआती अवस्था में कम ही लिवर कैंसरों का पता लग पाता है।

कुछ मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट पर विचार किया जा सकता है। अनेक उपचार विधियां प्रायोगिक स्तर पर हैं। अनेक मामलों में इलाज संभव नहीं हो पाने पर उपचार को कैंसर के लक्षणों से राहत दिलाने, इसे बढ़ने, फैलने या फिर से होने से रोकने पर फोकस किया जाता है।

लिवर कैंसर में सर्जरी का विकल्प कम ही प्रयोग किया जाता है क्योंकि इससे लिवर के ठीक काम न करने या दूसरी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं के चलते सर्जरी का विकल्प उनके लिए कारगर नहीं हो सकता है। सर्जरी आमतौर से ऐसे लोगों के लिए कारगर नहीं होती जिनको सिरोसिस, हेपैटाईटिस या विविध स्थामनों पर लिवर के अनेक ट्यूमर्स (मल्टीतपल लिवर ट्यूमर्स) की समस्या  होती है। ऐसे लोगों के लिए कैंसर की बढ़ोत्तोरी अस्थाई तौर पर रोकने और लक्षणों से राहत दिलाने के लिए दूसरी तकनीकें उपयोग की जा सकती हैं:

  • क्रॉयोसर्जरी-क्रॉयोसर्जरी में लिवर कैंसर को अत्यतधिक ठंडे मेटल प्रोब के द्वारा फ्रीज करके नष्ट  किया जाता है। इसे सामान्यत निश्चेतक के उपयोग के साथ किया जाता है और दोहराना पड़ सकता है। इससे होने वाली समस्याएं सामान्यतया कम होती हैं और रिकवरी आमतौर से तेजी से होती है।
  • एथेनॉल एब्लेशन:एथेनॉल एब्लेशन, इसे परक्यूटेनस एथेनॉल इंजेक्शन भी कहते हैं इसमें सांद्र(कांसंट्रेटेड) एथेनॉल को सीधे लिवर कैंसर में डाला जाता है। यह कैंसर कोशिकाओं को डिहाईड्रेट करके मार देता है। इसे लोकल एनेस्थेसिया के उपयोग द्वारा किया जा सकता है। इंजेक्शन लगाने वाली जगह पर कुछ मिनटों तक रहने वाला दर्द और इंजेक्शन के बाद बुखार इसके साईड इफेक्ट हैं।
  • कीमोथेरेपी: नई कीमोथेरेपी के आगमन ने हेपैटोसेलुलर कैंसर से ग्रस्त मरीजों के लिए नई संभावनाएं जगा दी हैं। उच्च स्तरीय या मेटास्टेसटिक हेपैटोमा वाले मरीजों के उपचार के लिए हाल ही में सोराफैनिब नाम की एक दवा का अनुमोदन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा किया गया है जो लिवर कैंसर में कुछ बेहतर प्रभाव प्रदर्शित करने वाली अपने प्रकार की पहली दवा है। इसके अलावा दूसरी दवाएं, जो ट्यूमरों को रक्त आपूर्ति कम कर देती हैं, भी मददगार साबित हुई हैं। कभी-कभी कीमोथेरेपी दवाओं को सीधे रक्त वाहिनियों में (हेपैटिक आर्टिरी) प्रवेश कराने पर भी विचार किया जा सकता है।

 

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लिवर कैंसर के ज्यायदातर मामलों में पूरे ट्यूमर को निकालना संभव नहीं होता या कैंसर लिवर में काफी अधिक या दूर तक फैल चुका होता है। इन स्तरों के लिवर कैंसर के लिए कोई मानक उपचार नहीं हैं। आप किसी क्लीनिकल ट्रॉयल में हिस्सा ले सकते हैं-जो परीक्षण का एक प्रायोगिक उपचार होता है। इन ट्रॉयलों के अपने जोखिम होते हैं क्योंकि कभी-कभी ये उपचार कारगर नहीं होते और आपको पहले से अनुमान न किए गए साईड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है।

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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