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जल्द नहीं दिखाई देते लिवर कैंसर के लक्षण, जानें लिवर कैंसर को जल्दी डायग्नोज करने के तरीके

Updated at: Jan 14, 2020
कैंसर
Written by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Apr 15, 2013
जल्द नहीं दिखाई देते लिवर कैंसर के लक्षण, जानें लिवर कैंसर को जल्दी डायग्नोज करने के तरीके

लिवर कैंसर के लक्षण जल्दी देखने को नहीं मिलते, ऐसे में यह समस्या अधिक बढ़ सकती है जानें लिवर कैंसर को जल्दी डायग्नोज कैसे करें!

लिवर कैंसर, लिवर में होने वाला एक घातक ट्यूमर है। यह कैंसर हमारे लिवर की सभी कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। जिसके कारण हमारा लिवर ठीक से काम करना बंद कर देता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। हालांकि लिवर कैंसर के लक्षण इसके बढ़ने तक दिखाई नहीं देते। जिसके चलते इसके बारे में पता लगा पाना काफी मुश्किल हो जाता है। यह हमारे लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यहां हम आपको लिवर कैंसर का निदान करने के लिए कुछ जरूरी टेस्टों के बारे में बता रहे हैं जो लिवर कैंसर का निदान करने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। जिससे आप समय रहते कैंसर का निदान कर इसका जल्द से जल्द इलाज करा सकें। जानें लिवर कैंसर का निदान कैसे किया जा सकता है-

liver cancer

आमतौर पर शुरूआती स्थिति में लिवर कैंसर की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। लिवर कैंसर शरीर में अधिक बढ़ने के बाद ही इसके लक्षण देखने को मिलते हैं। भूख न लगना, कमजोरी, सूजन, पीलिया और ऊपरी पेट की परेशानी इसके मुख्य लक्षणों में से एक है। लिवर कैंसर का निदान करने के लिए रोगी के चिकित्सा के इतिहास के बारे में जानना बहुत जरूरी होता है। साथ ही शारीरिक टेस्टों के आधार पर ही यह प्रक्रिया शुरू की जाती है। यदि आप लम्बे समय से एल्कोहल का सेवन कर रहे हैं या इसके अलावा आपके हैपेटाईटिस बी या सी संक्रमित हैं। तो अपने डॉक्टर को इसके बारे में जरूर बताएं।

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लिवर कैंसर का निदान कैसे करें

  • लीवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function test): आपके रक्त में मौजूद प्रोटीन, लिवर एंजाइम और बिलीरुबिन (Bilirubin) के स्तर को मापकर आपके लिवर के स्वास्थ्य को निर्धारित करने में डॉक्टर की मदद करते हैं।
  • ब्लड टेस्ट: अल्फा-फेटोप्रोटीन (Alpha-Fetoprotein) की उपस्थिति लिवर कैंसर का संकेत हो सकती है। यह प्रोटीन आमतौर पर बच्चों के पैदा होने से पहले ही उनके लिवर और योक थैली (yolk Sac) में बनना शुरू हो जाता है और बच्चे के जन्म के बाद उनमें इसका उत्पादन बंद हो जाता है।
  • शारीरिक जांच: शरीर में वजन की कमी होना, कुपोषण, कमजोरी, लिवर का बढ़ना और इससे जुड़ी बीमारियों जैसे हैपेटाइटिस और सिरोसिस की जांच।
  • सीटी स्कैन: ट्यूमर की खोज करने और उसकी स्थिति के बारे में जानने के लिए एक्स-रे और कम्पयूटर तकनीक का प्रयोग किया जाता है। साथ ही इस प्रकिया का इस्तेमाल शरीर की अनुप्रस्थ (क्रॉस सेक्शूनल) छवियों को निर्मित करने के लिए किया जाता है।
  • अल्ट्रा साउंड: इसके द्वारा लिवर कैंसर को खोजकर उसकी पहचान सुनिश्चित की जाती है। साथ ही इससे यह पता चलता है कि ट्यूमर कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंथट) हैं या कैंसररहित (सामान्य)।
  • हेपैटिक आर्टिरी एंजियोग्राम: इस टेस्ट के माध्यम से इंजेक्ट की गई रक्त वाहिनियों वाहिनियों का पता लगाया जाता है। जिसमें एक्स-रे व डाई के जरिए इसकी जांच की जाती है । ऐसी रक्त वाहिनियों की जांच की जाती है जो लिवर कैंसर को रक्त पहुंचाती हैं। साथ ही इससे यह भी सुनिश्चित किया जा सकता है कि ट्यूमर को सर्जिकल तरीके से हटाया जा सकता है या नहीं।
  • मैग्नेटिक रिजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई): एक तकनीक जिसमें शरीर के अंदर की बनावट जानने के लिए चुम्बकीय क्षेत्र का प्रयोग होता है। इसमें कम्यूटर टोमोग्राफी या अल्ट्रा साउंड की अपेक्षा अधिक सटीक छवियां निर्मित होती हैं आमतौर से इसकी जरूरत नहीं पड़ती।

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy)

लिवर कैंसर के निदान के लिए अन्य टेस्ट भी मौजूद है जैसे कि लिवर बायोप्सी। लिवर बायोप्सी में लिवर टिशू के एक छोटे टुकड़े को नमूने के तौर पर निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान रोगी को बेहोश कर दिया जाता है जिससे कि उसे किसी भी प्रकार के दर्द या तकलीफ से बचाया जा सके।

ज्यादातर मामलों में एक नीडल बायोप्सी (Needle biopsy) की जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान आपका डॉक्टर लिवर टिशु का नमूना लेने के लिए रोगी के पेट और लिवर में एक पतली सुई डालते हैं। कैंसर के संकेतों का पता लगाने के लिए टिशु के नमूने की माइक्रोस्कोप के द्वारा जांच की जाती है।

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लिवर बायोप्सी के लिए लैपरस्कोप का उपयोग भी किया जा सकता है जिसमें एक कैमरा के साथ एक पतली, लचीली ट्यूब जुड़ी होती है। कैमरा डॉक्टर को यह देखने में मदद करता है कि लिवर कैसा दिखता है और बेहतर तरीके से बायोप्सी करने की अनुमति देता है। लेप्रोस्कोप पेट में एक छोटे चीरे के माध्यम से डाला जाता है यदि शरीर के अन्य अंगों के टिशु के नमूने की आवश्यकता होती है तो आपका डॉक्टर एक बड़ा चीरा भी लगा सकता है। इसे प्रक्रिया को लैपरोटॉमी कहा जाता है।

यदि लिवर कैंसर पाया जाता है तो आपका डॉक्टर कैंसर के चरण का निर्धारण करेगा। कैंसर के चरण से उसकी गंभीरता या सीमा का पता चलता है। यह आपके डॉक्टर को उपचार के लिए बेहतर विकल्प और दृष्टिकोण को निर्धारित करने में उनकी मदद कर सकता है।

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