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रूट कैनाल के बाद दांत फिर से बहाल करना

Updated at: Jan 24, 2013
मुंह स्‍वास्‍थ्‍य
Written by: डा पूनम सचदेवPublished at: Jan 01, 2013
रूट कैनाल के बाद दांत फिर से बहाल करना

रूट कैनाल प्रक्रिया के बाद आपके दाँत को फिर से बहाल किये जाने की आवश्यकता हो सकती है। इससे आपके दांतों को प्राकृतिक आकार मिलता है एवं पहले जैसा  हीं दिखता है।  सामने वाले दांतों में दांतों को बहाल करने के लिए समग्र फिलिंग सामग्री भरी जाती है। मोलर और प्रीमोलर के को मुकुट की जरूरत पड़ती है। मुकुट बनाने से पहले आपके डेंटिस्ट एक बेस या आधार बनायेंगे ताकि वे दांत को सुदृढ़ करने लिए सपोर्ट दे सकें।  ऐसे आधार जो दांत को सुदृढ़ करने के लिए होते हैं उन्हें कोर कहा जाता है। कोर को पकड़ने के लिए एक पोस्ट की आवश्यकता हो सकती है। पोस्ट एक छड़ होता है जो धातु का बनाया हुआ होता है। आपके डेंटिस्ट रूट केनाल्स में से थोड़ी सी रूट फिलिंग सामग्री निकाल सकते हैं ताकि पोस्ट के लिए जगह तैयार हो सके।  मुकुट किसी दंत प्रयोगशाला में तैयार किया जाता है। मुकुट बनाने के लिए जिन सामग्री का  इस्तेमाल किया जाता है वे  चीनी मिट्टी, धातु, या एक दो भिन्न सामग्रियों के मिश्रण होते हैं। आधार पर मुकुट को लगाया जाता है।

 

संभावित पुनः उपचार या सर्जरी

 

रूट कैनाल प्रक्रिया असफल भी हो सकती है। रूट केनाल उपचार की विफलता के निम्न कारण हो सकते हैं:

  • केनाल से यदि संक्रमण को पूरी तरह से नहीं निकला गया हो तो
  • सभी केनाल्स यदि साफ नहीं किये गए हो तो अथवा
  • अगर दांतों में पुरानी फिलिंग की गई हो और किसी कारण से पुराने फिलिंग या दांत में संक्रमण हो गया हो या रिसाव होने लगा हो तो बैक्टीरिया वहां फिर से समा सकते हैं। 

अगर पुनः रूट केनाल उपचार करने की नौबत आती है तो यह प्रक्रिया पहले की अपेक्षा ज्यदा जटिल होती है तथा पहले की अपेक्षा ज्यादा समय लेती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि :

  • दुबारा रूट केनाल उपचार करने के लिए पहले वाले कठोर सामग्री को निकलना पड़ता है और
  • अधिकांश रूट केनाल उपचार जो असफल हो चुके होते हैं, उनमें संक्रमण हो जाता है जिन्हें दूर करना पहले की अपेक्षा मुश्किल होता है।

आपको पुनः रूट केनाल उपचार के लिए एंडोडोडोंटिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर दोबारा रूट केनाल उपचार करना संभव नहीं हो तो एंडोडोडोंटिक एपीकोएक्टोमी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। एपीकोएक्टोमी के दौरान रूट का टिप या एपेक्स या संक्रमित उत्तक को हटाया जाता है। उसके बाद फिलिंग की जाती है ताकि रूट का अंतिम भाग सील हो जाये। एक ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप  के उपयोग से एपीकोएक्टोमी सर्जरी की जाती है। यही वजह है कि एपीकोएक्टोमी सर्जरी को  एंडोडोडोंटिक माईक्रोसर्जरी   भी कहा जाता है।  एपीकोएक्टोमी सर्जरी की जरूरत तब पड़ सकती है यदि रूट केनाल के पुनः उपचार के बाद भी संक्रमण रह जाता हो। एपीकोएक्टोमी सर्जरी की सफलता कि दर लगभग 80% से 90% होती है। अगर एपीकोएक्टोमी सर्जरी के बाद भी दांत में संक्रमण रह जाता हो तो फिर दांत उखाड़ना ही पड़ता है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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