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यूटेराइन कैंसर का निदान

कैंसर By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 11, 2013
यूटेराइन कैंसर का निदान

यूटेराइन कैंसर का निदान: यूटेराइन कैंसर के निदान के लिए पढ़ें। जानें क्या है यूटेराइन कैंसर के निदान के तरीके।

uterine cancer ka nidaanयूटेराइन कैंसर के निदान के लिए निम्न तकनीक अपनाई जाती है जानें क्या हैं वो तकनीक-


शारीरीक जाँच और इतिहास


शरीर का परिक्षण सेहत के सामान्य संकेत के लिए, जिनमे बिमारी के संकेत  जैसे ढेला या कोई असामान्य चीज देखना। मरीज की सेहत का इतिहास और उसकी पिछली बिमारियाँ और उपचार भी देखे जाते है।


प्रयोगशाला जाँच


चिकित्सक जाँचे जो कि रक्त,ऊतक और पेशाब कि कि जाँच करती है।यह जाँचे बिमारी का निदान, रूपरेखा , उपचारो की जाँच और समय के साथ बिमारी का संचालन करने में मदद करती है।


मूत्र कोशिकाविज्ञान


सूक्ष्मदर्शी के नीचे पेशाब कि जाँच ताकि असामान्य कोशिकाए देखने के लिए


मूत्रजाँच


पेशाब का रंग और उसकी विषय वस्तु जैसे शुगर,प्रोटीन, रक्त, और श्वेत रूधिर कोशिकाओ कि जाँच करने के लिए।अगर श्वेत रूधिर कोशिका (संक्रमण का संकेत) मिलते हैं तो संक्रमण के प्रकार को देखने के लिए यूरीन कल्चर किया जाता है।


डिजिटल रेक्टम जाँच


मलाशय कि जाँच।इसमे एक डाक्टर या नर्स अपनी चिकनी,दस्तानो से ढकी मलाशय के निचले हिस्से मे डाल देते है और किसी ढेले या कोई असामान्य सी दिखने वाली चीज के महसूस करते हैं।जब मरीज बेहोशी कि हालत में है तब भी इस प्रक्रीया को किया जा सकता है।


श्रोणीय जाँच


योनि ,ग्रीवा, गर्भाशय, अण्डवाहिनी, अणडाशय, और मलाशय कि जाँच की जाती है।एक डाक्टर या नर्स अपनी एक हाथ कि एक या दो चिकनी,दस्तानो से ढकी उँगली योनि के अन्दर डालता है और दूसरा हाथ पेट कि निचली सतह पर रखता है  ताकि गर्भाशय, और अणडाशय का आकार,विस्तार और स्थान पता लग सके।योनि के अन्दर एक स्पेकुलम भी भी डाला जाता है ताकि डाक्चर और नर्स य़ोनि और ग्रीवा को बिमारी के संकेत देखने के लिए देखा जा सके। जब मरीज बेहोशी कि हालत में है तब भी इस प्रक्रीया को किया जा सकता है। योनि, अण्डवाहिनी, अणडाशय,ग्रीवा और मलाशय कि जाँच भी की जाती है।


सिस्टोस्कोपी


एक प्रक्रीया जिसमे मूत्रमार्ग और मूत्राशय के अन्दर आसामान्य जगहो कि जाँच कि जाती है। सिस्टोस्कोप (एक पतली रोशन नली) मूत्रमर्ग के रास्ते मूत्राशय में डाला जाता है।बायोप्सी के लिए ऊतक के नमूने भी लिए जा सकते हैं


बायोप्सी


ऊतक और कोशिकाओ को मूत्रमार्ग , मूत्राशय और कभी कभी प्रोस्टेट ग्रन्थी के अन्दर से निकालना ताकि पैथोलोजिस्ट द्वारा उनकी सूक्ष्मदर्शी के नीचे जाँच हो सके।

 

 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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