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युवाओं में बढ़ रही है बहरेपन की समस्या

परवरिश के तरीके By अन्‍य , दैनिक जागरण / Feb 04, 2011
युवाओं में बढ़ रही है बहरेपन की समस्या

ध्वनि प्रदूषण की समस्या तो सामाजिक हो ही चली है, लेकिन आज के युवा खुद अपनी श्रवण शक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं।

ध्वनि प्रदूषण की समस्या तो सामाजिक हो ही चली है, लेकिन आज के युवा खुद अपनी श्रवण शक्ति के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। टेलीविजन अगर उनकी श्रवण शक्ति के लिए 'साइलेंट किलर' है, तो मोबाइल फोन और आईपॉड जैसे उपकरण जिंदा मक्खी निगलने जैसे है।


चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें, तो इस हाईटेक दौर में देश के युवाओं में बहरेपन की समस्या बढ़ रही है।


ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्राची सभरवाल कहती हैं, 'कानों के अंदर सूक्ष्म तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं जो ध्वनि संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचाती हैं। 80 डेसिबल से अधिक ध्वनि तंत्रिका कोशिकाओं को अक्षम बना सकती हैं और व्यक्ति बहरेपन का शिकार हो जाता है। ध्वनि के साथ मोबाइल फोन और आईपॉड आदि की चुंबकीय तरंगें भी तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट करती हैं।'


वह कहती हैं 'इस स्थिति में व्यक्ति केवल उूंची आवाज ही साफ सुन सकता है। धीमी आवाज उसे सुनाई नहीं देती। इसे 'हाई फ्रिक्वेन्सी हियरिंग लॉस' कहते हैं।' ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. जी के गौर कहते हैं, 'बुजुर्गों की तुलना में इन दिनों युवाओं में बहरेपन की समस्या बढ़ रही है। मोबाइल फोन पर देर तक बातचीत करना, आईपॉड पर तेज संगीत सुनना, पार्टियों का शोर आदि बहरेपन के मुख्य कारण हैं।' विशेषज्ञों के अनुसार, शुरू में युवाओं का ध्यान इस ओर नहीं जाता और समस्या धीरे धीरे बढ़ जाती है। नतीजा 'कंप्लीट हियरिंग लॉस' हो जाता है और इसकी भरपाई नहीं होती।


क्या करें : इस बात को लेकर हमेशा सतर्कता बरतनी चाहिए कि ध्वनि उतनी ही तेज हो जिससे कानों को नुकसान न हो।


टीवी एक साइलेंट किलर है। इसकी आवाज धीमी ही रखनी चाहिए। एक बार तेज आवाज सुनने के आदी हो जाने पर लोग टीवी तेज चलाना ही पसंद करते हैंै। अक्सर घरों में वयस्क अक्सर वॉल्यूम बढ़ा देते हैं। उन्हें ध्यान नहीं रहता कि इससे बच्चाच्ं को नुकसान हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कॉल सेंटर, बीपीओ या ऐसे संस्थानों में कार्यरत लोगों को खास सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि इन्हें कानों से जुड़ी बीमारी आसानी से हो सकती है। बेहतर होगा कि हर घंटे कम से कम दस मिनट का ब्रेक अवश्य लें।

 

Written by
अन्‍य
Source: दैनिक जागरणFeb 04, 2011

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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