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मोबाइल टावर से गर्भवती महिला के बच्चे को खतरा नहीं

डायबिटीज़ By ओन्लीमाईहैल्थ लेखक , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 14, 2013
मोबाइल टावर से गर्भवती महिला के बच्चे को खतरा नहीं

अध्ययन में किया गया दावा

 

मोबाइल फोन के दुष्परिणामों के लेकर लंबी बहसें दुनिया भर में चल रही हैं। इनमें एक यह भी है कि मोबाइल फोन के टावर गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। लेकिन

अध्ययन में किया गया दावा

 

मोबाइल फोन के दुष्परिणामों के लेकर लंबी बहसें दुनिया भर में चल रही हैं। इनमें एक यह भी है कि मोबाइल फोन के टावर गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। लेकिन अब विस्तृत अध्ययन में दावा किया गया है कि मोबाइल फोन के टावर के नजदीक रह रही महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे में इससे कैंसर का कोई खतरा नहीं होता। यह अध्ययन ब्रिटेन में किया गया है।

 

इस अध्ययन के बाद मोबाइल से कैंसर होने की पुरानी अवधारणा पर तात्कालिक विराम लगा है।
शोधकर्ताओं ने पांच साल से कम उम्र के सात हजार बच्चों और उनमें हुए कैंसर के प्रकारों का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जिन बच्चों में कैंसर था, उनका मोबाइल टावर से कोई संबंध नहीं था।

 

प्रमुख शोधकर्ता इंपीरियल कॉलेज लंदन के पॉल इलियट ने बताया, 'ये अध्ययन मोबाइल टावर को लेकर हमारी भ्रांतियां दूर करता है। शोध के दौरान हमें ऐसे कोई भी प्रमाण नहीं मिले, जिससे यह साबित हो सके कि मोबाइल टावर के नजदीक रहने वाली महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चे में अन्य बच्चों की अपेक्षा कैंसर की आशंका अधिक होती है।'

 

पिछले कुछ सालों में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या में जबर्दस्त उछाल आया है। लेकिन साथ ही मोबाइल से जुड़े स्वास्थ्य दुष्परिणामों के बारे में लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। अध्ययन के नतीजे ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) में बुधवार को  प्रकाशित हुए हैं।

'सेकेंड हेंड स्मोक' से दिल की बीमारी का खतरा अधिक

 

सिगरेट और बीड़ी के कश लेना स्वास्थ्य के लिए तो बुरा है, लेकिन उससे भी ज्यादा घातक 'सेकेंड हैंड स्मोक' है। 'सेकेंड हैंड स्मोक' कश लेने वालों द्वारा छोड़ा गया धुआं होता है। जो उनके नजदीक रहने वालों की सांसों में घुलता है। इस धुएं में सांस लेना दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है।

 

ब्रिटेन में हुए एक नए शोध में दावा किया गया है कि 'सेकेंड हैंड स्मोक' से प्रभावित होने वालों के हृदय रोग से मरने की संभावना दोगुनी हो जाती है।

 

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने 13 हजार से ज्यादा लोगों पर आठ साल तक लंदन में शोध किया। शोधकर्ताओं ने धूम्रपान के धुएं से प्रभावित होने लोगों की लार का परीक्षण किया। इससे पता चलता है कि व्यक्ति में कितनी मात्रा धुएं पहुंची।
शोध के दौरान 1500 में से धूम्रपान न करने वाले 32 लोग इससे खासे प्रभावित हुए। उनकी मौत हार्टअटैक से हुई। प्रमुख शोधकर्ता डॉ. हैमर ने कहा, 'सिगरेट के धुएं में रहने के कारण हृदय रोग से होने वाली मृत्यृ होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है।'

बंदरों से ज्यादा खतरनाक है आदमी का काटना

 

अभी तक जानवरों के काटने को खतरनाक माना जाता था। लेकिन वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत करार दिया है। उनका दावा है कि आदमी का काटना बंदरों से ज्यादा खतरनाक होता है। चिम्पैंजी, गुरिल्ला और वनमानुष की तुलना में मानव अधिक कुशलता से काटते हैं।

 

न्यू साउथवेल्स यूनिवर्सिटी के  स्टीफन व्रो के नेतृत्व में किए गए शोध के मुताबिक प्रारंभिक आधुनिक मानव को उच्च पोषक तत्वों वाले सख्त सूखे मेवों और मांस जैसे खाद्य पदार्थों को खाने के लिए औजारों या पकाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। शायद इस कारण बाद में वे सख्त चीजों को खाने की क्षमता खो बैठे हों।

 

शोधकर्ताओं के मुताबिक आधुनिक मानव कम शक्तिशाली मांसपेशियों का इस्तेमाल कर तेजी से काट सकता है। यह शोध 'प्रोसीडिंग्स ऑफ रॉयल सोसायटी बी जर्नल' में प्रकाशित हुआ है। इन परिणामों से पूर्व के अध्ययनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

पूर्व में हुए शोधों में कहा गया था कि आधुनिक मानव में कपाल तंत्र के कम विकास के कारण उसके काटने की क्षमता कमजोर हो गई है। यह व्यावहारिक परिवर्तनों की प्रतिक्रिया थी। जैसे खाने के लिए नरम खाने का प्रयोग करना। इसमें यह भी कहा गया कि बड़े मस्तिष्क का मार्ग प्रशस्त करने के लिए मानव की जबड़े की मांसपेशियां घट गईं।

एलर्जी से बचाएगा इंजेक्शन

 

एलर्जी का कोई सुनिश्चित इलाज नहीं है। इसलिए आम तौर पर अलग-अलग प्रकार की एलर्जी का उपचार भिन्न-भिन्न तरीकों से किया जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों ने ऐसा इंजेक्शन बनाने का दावा किया है जो तमाम तरह की एलर्जी से बचाएगा। साथ ही यह बुखार और अस्थमा में भी कारगर होगा। यह इंजेक्शन अगले चार साल में बाजार में आ जाएगा।

 

इंजेक्शन विकसित करने वाले साइटॉस बायोटेक्नोलॉजी के डॉ. वुल्फगैंग रेनर ने कहा, 'यह एक इंजेक्शन हर प्रकार की एलर्जी से बचाव में मददगार होगा। हम इसे लेकर काफी उत्साहित हैं।'

 

डेली एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हालिया परीक्षण में यह बात सामने आई है कि दमे से लड़ने में भी इंजेक्शन असरकारी है। शोध के दौरान 63 अस्थमा के मरीजों को दो से तीन महीनों तक इस इंजेक्शन को लगाने पर अस्थमा अटैक पड़ने की आशंका अन्य मरीजों के मुकाबले एक तिहाई कम हो गई।

 

डॉ. रेनर के मुताबिक इसका बड़े स्तर पर परीक्षण अगले साल शुरू किया जाएगा। यह इंजेक्शन चार साल बाद बाजार में मौजूद होगा।

ऐसे मिलेगा संपूर्ण पोषण

 

महिलाएं घर-परिवार की देखभाल के चक्कर में सेहत की अनदेखी कर जाती हैं। परिणाम..? गंभीर बीमारियों को बुलावा। जानिए उन पांच चीजों के बारे में जिन्हें महिलाओं को अपने भोजन में अवश्य शामिल करना चाहिए। इससे उनका आहार सम्पूर्ण होता है।
-पत्तेदार सब्जियां : खाने में पालक, मैथी, बथुआ, चुकंदर और उसके पत्ते, ब्रोकोली को शामिल करें। इनमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी, के और फोलिक एसिड होता है। इनसे शरीर को कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और पोटेशियम जैसे खनिज भी मिलते हैं।
-साबुत अनाज : हो सके तो साबुत अनाज को अंकुरित कर के खाएं। इसमें अन्य भोज्य पदार्थो की तुलना में 96 प्रतिशत अधिक रेशा होता है।

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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