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मधुमेह और टीबी में क्या संबंध है

ट्यूबरकुलोसिस By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 20, 2012
मधुमेह और टीबी में क्या संबंध है

आइए जानें मधुमेह और टीबी में क्या संबंध है।

Madumeh aur tb

टीबी (क्षय रोग, तपेदिक या ट्यूबरकुलोसिस) और मधुमेह में सीधा संबंध हैं। जिन लोगों को टाइप-2 मधुमेह होता है उनके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसलिए मधुमेह के रोगी में संक्रमण होने की संभावना बढ जाती है और उन लोगों में संक्रमणकारी रोगों के होने की संभावना ज्यादा होती है। जिनमें सांस संबंधी रोग विशेषकर ट्यूबरकुलोसिस या तपेदिक प्रमुख है। मधुमेह और टीबी से ग्रसित लोगों पर दवाइयों का असर कम होता है और ऐसे लोगों को मल्टी ड्रग रेजीस्टेंनस-टीबी या एमडीआर-टीबी होने का खतरा भी बढ जाता है।


क्या कहता है शोध -

विभिन्न शोधों के अनुसार जिन लोगों में ब्लड शुगर की मात्रा ज्यादा दिनों तक बढी रहती है उनमें ट्यूबरकुलोसिस या टीबी होने का खतरा बढ जाता है, और जिन लोगों को टाइप-2 मधुमेह और टीबी दोनों हो उनमें टीबी की दवाइयों का असर धीरे-धीरे और देरी से होता है। ऐसे लोगों को मल्टी ड्रग रेजीस्टेंट-टीबी का खतरा बढ जाता है। इन दोनों बीमारियों से ग्रस्त लोगों की रोग-प्रतिरोधक (इम्यून सिस्ट्म) क्षमता कम हो जाती है।


मधुमेह और टीबी में संबंध –

 

  • मधुमेह रोगियों में ब्लड शुगर अधिक दिनों तक रहता जिससे टीबी की संभावना ज्यादा होती है
  • एमडीआर-टीबी (टीबी का प्रकार) के रोगियों में सबसे प्रभावकारी तपेदिक की दवाइयां कारगर नहीं होती हैं। एमडीआर-टीबी का इलाज लंबे समय तक होता है।
  • टाइप-2 मधुमेह से ग्रसित लोगों में 6 प्रतिशत तक को एमडीआर-टीबी हो सकता है और 30 प्रतिशत एमडीआर-टीबी से ग्रसित लोगों में मधुमेह होने की ज्यादा संभावना होती है।
  • मधुमेह में आदमी का शरीर इंसुलिन का उचित ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता है और यदि मधुमेह नियंत्रित न किया गया तो इसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं जिसकी वजह से नसें, आंख की रेटीना, और रक्त वाहिनियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
  • टाइप-2 मधुमेह से ग्रस्त लोगों में टीबी का खासकर दवा-प्रतिरोधक क्षमता वाले टीबी बैक्टीरिया का खतरा ज्यादा होता है।
  • तपेदिक उन लोगों में ज्यादा होने की संभावना होती है जो शराब और अन्य-नशीले और मादक पदार्थों का सेवन करते हैं।
  • टाइप-2 मधुमेह रोगियों को टीबी न होने पर भी तपेदिक की जांच करानी चाहिए और टीबी के मरीजों को मधुमेह नहीं होने पर भी डायबिटीज की जांच करानी चाहिए।
  • भीड-भाड़ वाले इलाकों में बिना साफ-सफाई के रहने वाले लोगों को तपेदिक ज्यादा होने की संभावना होती है और जो लोग भीड-भाड़ वाले इलाकों में नहीं रहते हैं और मादक पदार्थों का सेवन नहीं करते हैं उनको टाइप-2 मधुमेह होने की संभावना ज्यादा होती है।
  • मधुमेह रोग संक्रमण से नहीं होता है लेकिन मधुमेह रोगियों के शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने से संक्रमणकारी रोगों (जिसमें टीबी प्रमुख है) के होने का खतरा बढ जाता है।

 



शरीर में जब इंसुलिन हार्मोन उत्पन्न नहीं होता है तब मधुमेह होता है इसके विपरीत टीबी एक संक्रमणकारी रोग है। लेकिन टाइप-2 मधुमेह रोगियों को उपचार के दौरान टीबी के लिए सजग रहना चाहिए। टीबी आशंका होने पर तुरंत उसी जांच करानी चाहिए। टीबी और एमडीआर-टीबी दोनों का इलाज संभव है।

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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