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ब्‍लैडर कैंसर का निदान

कैंसर By Pooja Sinha , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 16, 2013
ब्‍लैडर कैंसर का निदान

ब्‍लैडर कैंसर का निदान : जानिए कैसे, ब्‍लैडर कैंसर के निदान के लिए चिकित्सक आपके चिकित्सकीय इतिहास की समीक्षा करेगा विशेष रूप से तब जब आपको पहले कभी गुर्दे की पथरी हुई हो या यूराइनरी ट्रैक‍ से सम्बन्धी संक्रमण हुआ हो

ब्लैडर इंफेक्शन का निदान यूरीन टेस्‍ट से किया जा सकता है। ब्लैडर संक्रमण में पाए गए बैक्टीरिया और संक्रमण फैलने के कारणों को ध्यान रखकर ही इसका ट्रीटमेंट किया जाता है।

bladder cancer ka nidaanब्‍लैडर कैंसर के निदान के लिए चिकित्सक आपके चिकित्सकीय इतिहास की समीक्षा करेगा विशेष रूप से तब जब आपको पहले कभी गुर्दे की पथरी हुई हो या यूराइनरी ट्रैक‍ से सम्बन्धी संक्रमण हुआ हो क्योंकि इन कारणों से भी यूरीन में रक्त आ सकता है।

साथ ही चिकित्‍सक आहार और धूम्रपान के बारे में भी पता करने की कोशिश करेगा। अगर आप अभी धूम्रपान नहीं कर रहे हैं लेकिन पहले धूम्रपान करते थे तो भी चिकित्सक को बताना आवश्यक है। क्‍योंकि अगर धूम्रपान छोड़ भी दिया है तो भी धूम्रपान त्यागने के 10 साल बाद तक आपमें ब्लैडर के कैंसर के होने की सम्भावना रहती है।

डाकटर लक्षणों और जोखिम कारकों को ध्यान में रखते हुए पुरूषों में रेक्टल और महिलाओं में पेल्विक जांच करेगा। रेड ब्लड सेल में किसी प्रकार के संक्रमण के लिए ब्‍लड टेस्‍ट और संक्रमण की जांच करने की सलाह देता है। इनके अलावा यूरीन के नमूने को विशेष प्रयोगशाला में कैंसर के सेल्स की जांच के लिए भी भेजा जाता है।

ब्लैडर कैंसर का संदेह होने पर जो मुख्य जांच की जाती है उसे सिस्टोस्कोपी कहते हैं, इस जांच में चिकित्सक एक चिकित्सा उपकरण को मरीज़ के ब्लै‍डर में यूरेथ्रा के रास्ते डालकर ब्लैडर की आंतरिक दीवार की जांच करता है।

सिस्टोस्कोपी की सहायता से आपका चिकित्सक यह पता लगाने में समर्थ होता है कि ब्लैडर के अंदर ट्यूमर बन रहा है कि नहीं। सिस्टोस्कोंपी के दौरान आपका चिकित्स‍क या तो ट्यूमर की बायोप्सी करता है या फिर ट्यूमर को पूर्ण रूप से निकाल देता है। बायोप्सी के दौरान टिश्यू के एक छोटे भाग को निकाल दिया जाता है जिससे कि माइक्रोस्कोप के अंदर इसकी जांच की जा सके।


ब्‍लैडर कैंसर का निदान के उपाय

  • सी टी स्कैन जिसे सी टी यूरोग्राम कहते हैं : सी टी यूरोग्राम कम्प्‍यूटराइज़ड थ्री डाइमेंशनल इमेज बनाता है, जिसकी मदद से चिकित्सक गुर्दे, ब्लै‍डर और यूरेटर साफ–साफ दिखें।
  • एक्स–रे जांच को इन्ट्रावेनस पाइलोग्राम (आई वी पी) कहते हैं : आई वी पी के दौरान एक डाई का इंजेक्शन रक्त में लगाया जाता है और गुर्दे और यूरेटर की एक्स–रे जांच की जाती है। डाई का प्रयोग करने पर यह गुर्दे से होते हुए ब्लैडर तक पहुंचती है।
  • आई वी पी : अप्पर यूराइनरी ट्रैक में किसी प्रकार के ट्यूमर की जांच करने के लिए आई वी पी किया जाता है। यह जांच आजकल कम ही की जाती है क्योंकि सी टी यूरोग्राम अधिक विस्तृत चित्र प्रदान करता है।
  • रेटरोगेट पाइलोग्राम : यह जांच आई वी पी जैसी ही है लेकिन यह सिर्फ सिस्टोस्कोपी के दौरान यूरालाजिस्ट द्वारा की जाती है। इस जांच में रक्त में डाई का इंजेक्शन लगाने की बजाय सिस्टोस्कोपी के दौरान यूरालाजिस्ट सीधा यूरेटर में इंजेक्शन लगाता है।
  • एम आर आई (मैगनेटिक रेज़ोनैंस इमेज) : हीमैट्यूरीया का मूल्यांकन करने के लिए ब्लैडर और गुर्दे का एम आर आई किया जाता है या अगर चिकित्सक सिस्टोस्कोपिक परीक्षा के दौरान ब्लैडर में कोई असामान्यता पाता है तो भी एम आर आई करानी पड़ती है।
  • पेट का और पेल्वि‍क अल्ट्रासाउन्ड : इस जांच से आपके यूरेटर की स्थिति के बारे में आपको महत्व‍पूर्ण जानकारी मिलती है और अगर ब्लैडर में किसी प्रकार की रूकावट पायी जाती है तो दूसरी जांच होती है।

 


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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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