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ब्लड कैंसर का ईलाज

कैंसर By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 29, 2012
ब्लड कैंसर का ईलाज

ब्लड कैंसर का ईलाज: ल्‍यूकीमिया का ईलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है, यानी हर तरह के ब्लड कैंसर को ठीक करने का अलग ईलाज है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि रोगी की उम्र क्या है और उसे किस जगह पर कैंसर हुआ है।

ल्यूकीमिया रक्त कोशिकाओं का कैंसर है। ल्यूकीमिया का कारण तो पता नहीं लग सका लेकिन किन- किन कारणों से इसके होने का खतरा है इसकी पहचान कर ली गई है।

blood cancer ka ilaaj

सभी रक्त कोशिकाओं की तरह ल्यूकीमिया भी पूरे शरीर में घूमता रहता है। ल्यूकीमिया के लक्षण ल्यूकीमिया सेल्स की संख्या व ये सेल्स शरीर में कहां पर है इस पर निर्भर करता है। ल्यूकीमिया चार प्रकार के होते हैं एक्यूट लिम्फोसाईटिक ल्यूकीमिया, क्रोनिक लिम्फोसाईटिक ल्यूकीमिया, एक्यूट माइलोसाईटिक ल्यूकीमिया और क्रोनिक माइलोसाईटिक ल्यूकीमिया।

ल्यूकीमिया का ईलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है, यानी हर तरह के ब्लड कैंसर को ठीक करने का अलग ईलाज है। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि रोगी की उम्र क्या है और उसे किस जगह पर कैंसर हुआ है।

ल्यूकीमिया से जूझ रहे मरीज के पास ईलाज के कई विकल्प हैं। कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, रेडिएशन थेरेपी, बॉयोलॉजिकल थेरेपी और स्टेम सेल ट्रांसप्लांट थेरेपी। अगर ट्यूमर बड़ा है तो डॉक्टर इसकी सर्जरी करने की सलाह देते हैं।

 

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 मरीज की देख रेख

अगर आप और आपका डॉक्टर इस पर सहमत हो जाते हैं कि सावधानी से देख रेख करना एक अच्छा विचार है तो आपको हर तीन महीने पर नियमित जांच करवनी होगी। अगर आपको कोई लक्षण दिखते हैं तो आप कैंसर का इलाज शुरु कर सकते हैं। मरीज की सावधानी से देख-रेख करने का तरीका अपनाने ने कैंसर के ईलाज के दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं। इससे ल्यूकीमिया का पता बढ़ने से पहले ही चला जाता है और शुरुआती अवस्था में इलाज संभव होता है।

किमोथेरेपी

कईलोग किमोथेरेपी के जरिए ल्यूकीमिया का ईलाज करवाते हैं। इस थेरेपी में दवाओं के जरिए कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है। यह दवा गोली के रुप या इंजेक्शन के जरिए मरीज को दी जाती है। मरीज के शरीर में फैले ल्यूकीमिया पर निर्भर करता है कि उसे एक दवा देनी है या उसके साथ कुछ और दवा देनी है।

बॉयोलॉजिकल थेरेपी

ल्यूकीमिया में कुछ लोग दवा लेते हैं इसे बॉयोलॉजिकल थेरेपी कहते हैं। इस थेरेपी के जरिए शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा बढ़ती है। इसमें त्वचा के अंदर मांस में दवा को सीरींज के जरिए डाला जाता है। यह रक्त में फैले ल्यूकीमिया सेल्स की गति को धीमा कर देता है और रोगी के कमजोर इम्मयून सिस्टम को शक्ति देता है। इस ईलाज के साथ अन्य कोई दवा देने पर इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

 

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रेडिएशन थेरेपी

रेडिएशन थेरेपी एक्स रे की ही तरह होती है। इसमें किसी प्रकार का कोई दर्द नहीं होता है। इसमें एक बड़ी मशीन के जरिए निकलने वाली ऊर्जावान किरणें रोगी के शरीर में जाकर कैंसर के सेल्स को खत्म कर देता है। इस थेरेपी को करते समय शरीर के स्वस्थ्य सेल भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं लेकिन व सेल्स समय के साथ ठीक हो जाते हैं।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

ल्यूकीमिया का इलाज स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरिए भी किया जाता है। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में आपको दवाईयों की हाई डोज व रेडिएशन थेरेपी दी जाती है। दवाओं के हाई डोज से अस्थि मज्जा (बोन मेरो) में ल्यूकीमिया कैंसर सेल व स्वस्थ सेल दोनों प्रभावित होते हैं। हाई डोज किमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी के बाद लंबी नस के माध्यम से आपको स्वस्थ कोशिकाएं मिलती हैं। ट्रांसप्लांटेड स्टेम सेल से नई रक्त कोशिकाएं बनती हैं।

 

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