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बैक्टीरिया करें एंटीबायोटिक्स को बेअसर

अन्य़ बीमारियां By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 15, 2011
बैक्टीरिया करें एंटीबायोटिक्स को बेअसर

सिर दर्द, बदन दर्द, जुकाम इत्यादि के निवारण के लिए ली गई एंटीबायोटिक्स इन बीमारियों के बै‍क्टीरिया को खत्म कर देतीं हैं। लेकिन बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली इन एंटीबायोटिक्स का प्रभाव शरी

अक्सर छोटी-मोटी समस्याओं के लिए आमजन डॉक्टर के पास जाने के बजाय एंटीबायोटिक्स लेना बेहतर समझता है। लोगों में मिथ है कि सिर दर्द, बदन दर्द, जुकाम इत्यादि के निवारण के लिए ली गई एंटीबायोटिक्स इन बीमारियों के बै‍क्टीरिया को खत्म कर देतीं हैं लेकिन उनकी अब ये धारणा गलत साबित होने जा रही है।

 

बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए प्रयोग में लायी जाने वाली एंटीबायोटिक्स का प्रभाव शरीर पर लंबे समय तक अब नहीं रहता। हाल ही में हुए शोध ने इस बात का खुलासा किया है। दरअसल वातावरण में पाए जाने वाले ये जीवाणु शक्तिशाली रूप में न सिर्फ वातावरण में मौजूद हैं बल्कि शरीर में भी धीरे-धीरे इनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है जिससे एंटीबायोटिक्स इन पर बेअसर साबित हो रही हैं। एक बीमारी के जीवाणु जिनको एंटीबायोटिक्स पूरी तरह खत्म नहीं कर पाती यह अन्य बीमारी के जीवाणुओं के साथ मिलकर पूरे शरीर में फैल जाते हें नतीजन, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है।

 

एक बीमारी के बैक्टीरिया शरीर में अलग-अलग रूपों में हमला करते हैं। जिससे कुछ बैक्टीरिया हर बीमारी के बाद शरीर के भीतर रह जाते हैं और अधिक माञा में पनपने लगते हैं। आपने अक्सर सुना होगा कि डॉक्‍टर्स दवाईयों का कोर्स पूरा करने की अक्स‍र सलाह देते हैं वह भी इसी कारण से। दरअसल शोध में पाया गया कि एंटीबायोटिक्स में भी कुछ माञा में बैक्टी‍रिया मिले होते है जो पहले से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया के साथ मिल जाते है। एक जगह से दूसरी जगह संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को पी 1 प्लाजमिड कहा जाता है। इसमें विभिन्‍न प्रकार के जीवाणु पैदा करने की क्षमता होती है जो एंटीबायोटिक दवाओं के असर को खत्म करने में कारगर होते हैं।

 

शोध में पाया गया कि जब अलग-अलग बैक्टीरिया एक-दूसरे में शामिल हो जाते हैं तो एंटीबायोटिक दवाईयां बहुत अधिक असरकारक नहीं रह पाती। जल्दी ही उनका असर खत्‍म हो जाता है और शरीर में जीवित बैक्टीरिया शरीर को कमजोर बनाते रहते हैं। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बैक्टीरिया मनुष्य के स्वास्‍थ्‍य को बहुत प्रभावित करते हैं। इस शोध का सीधा सा मकसद मेडिकल वैज्ञानिकों को जागरूक करना और उन्हें बताना है कि एंटीबायोटिक्स को बनाने के बजाय इस तरह के जीवाणुओं और उनके जींस को रोकने के उपाय खोजे जो एंटीबायोटिक्स से ज्यादा कारगर और बैक्टीकरिया नष्ट करने में मददगार साबित हो।

 

 

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