• shareIcon

फेफड़ों में छिपा वायरस बच्चों को दे सकता है तकलीफ

परवरिश के तरीके By अन्‍य , दैनिक जागरण / Jun 02, 2010
फेफड़ों में छिपा वायरस बच्चों को दे सकता है तकलीफ

आरएसवी की मौजूदगी से अस्थमा का खतरा
वाशिंगटन, रायटर : अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि आमतौर पर हानिकारक नहीं माना जाने वाला चाइल्डहुड वायरस फेफड़ों में छिपकर अस्थमा का कारण बन सकता है।

आरएसवी की मौजूदगी से अस्थमा का खतरा
वाशिंगटन, रायटर : अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि आमतौर पर हानिकारक नहीं माना जाने वाला चाइल्डहुड वायरस फेफड़ों में छिपकर अस्थमा का कारण बन सकता है।
चूहों पर किए गए प्रयोग में शोधकर्ताओं ने रेसीपिरेटरी सिंशीयल वायरस (आरएसवी) की फेफड़ों में मौजूदगी देखी और इसे अस्थमा के लिए जिम्मेदार पाया। टेक्सास यूनिवर्सिटी के डा. असुनसियन मेजियास के मुताबिक बच्चों के फेफड़ों में आरएसवी का होना बाद में अस्थमा का कारण बन सकता है। यह खोज बच्चों को सांस लेने में होने वाली तकलीफ का और बेहतर इलाज ढूंढने में कारगर हो सकती है।
पूर्व में किए गए शोधों में भी आरएसवी संक्रमण को फेफड़ों की बीमारी के लिए जिम्मेदार बताया गया था। डाक्टरों की राय में आरएसवी वायरस द्वारा हुआ संक्रमण अपने आप ठीक भी हो जाता है लेकिन कुछ मामलों में यह घातक साबित हो जाता है। डा. मेजियास कहते हैं, 'बच्चों में आरएसवी का संक्रमण होना आम बात है। यह संक्रमण बिना किसी खास परेशानी के एक हफ्ते में ठीक भी हो जाता है। लेकिन, 3 से 10 फीसदी मामलों में यह ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारी में बदल जाता है।'
एक अन्य शोधकर्ता डा. ओक्टावियो रामिलो आरएसवी के संक्रमण को काफी गंभीर करार देते हैं। उनके अनुसार इस संक्रमण को रोकने के लिए एंटीबाडी, खासकर प्रतिरक्षा तंत्र को उत्प्रेरित करने वाला प्रोटीन कारगर हो सकता है।

 

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK