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फेफड़ों के लार्ज सेल कैंसर का निदान

कैंसर By Anubha Tripathi , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 23, 2013
फेफड़ों के लार्ज सेल कैंसर का निदान

फेफड़ों के लार्ज सेल कैंसर का निदान: जानें फेफड़ों के लार्ज सेल कैंसर का निदान के लिए अपनाई जाने वाली तकनीक। 

large cell cancer of the lung ka nidaan

लार्ज सेल कार्सिनोमा का निदान प्राय: सीने के एक्स-रे द्वारा किया जाता है। एक्स रे में लार्ज सेल कार्सिनोमा की पहचान स्याह या गेहुंए हिस्से़ के रूप में की जाती है।  इसके बाद दूसरे इमेजिंग अध्ययन जैसे कि सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैनर और पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी स्कैन) का उपयोग ट्यूमर के आकार, बनावट और लोकेशन जानने के लिए किया जा सकता है। इससे ट्यूमर का एक नमूना (बॉयोप्सी के लिए) लेने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान चुनने में मदद मिलती है। बॉयोप्सी से लार्ज सेल कार्सिनोमा को दूसरे प्रकार के फेफड़ों के कैंसर जैसे स्मॉल सेल कार्सिनोमा या फेफड़ों का एडेनोकार्सिनोमा आदि से अलग पहचानने में मदद मिलती है। कैंसर का प्रकार जानने के बाद उसी के अनुसार उपचार किया जाता है।

 

ट्यूमर के प्रकार को जानने का अन्य तरीका स्पटम साइटोलॉजी है, जिसमें फेफड़ों (स्पटम) से श्लेमषमा (म्यूककस) लेकर असामान्य कोशिकाओं की पहचान के लिए मॉइक्रोस्कोप से इसकी जांच की जाती है। हालांकि, कैंसर के फेफड़ों के केन्द्र के पास स्थित होने की दशा में यह तकनीक बहुत प्रभावी है। फेफड़ों के किनारे स्थित छोटे ट्यूमरों की पहचान में यह तकनीक कारगर नहीं होती।

 

इस प्रकार के कैंसर के निदान के लिए अपनाए जा सकने वाले दूसरे परीक्षण निम्न हैं:

 

थोरासेन्टेकसिस - फेफड़ों और चेस्प वॉल के बीच भरे तरल प्यूकनीरल फ्ल्युइड को निकालने के लिए एक नीडिल का उपयोग किया जाता है। कैंसर कोशिकाओं की पहचान के लिए इस तरल की जांच की जाती है। इस प्रक्रिया को तब किया जाता है जब सीने के एक्स-रे में तरल के असामान्य संचय का पता चला हो।

 


मीडियास्टिनोस्कोटपी- यह सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें डॉक्टर बहुत छोटे चीरों के ज़रिए फेफड़ों से लिम्‍फ नोड्स निकाल देते हैं। ये चीरे आमतौर से गर्दन के नीचे, वक्षास्थि (चेस्टी बोन) के दाहिनी ओर लगाए जाते हैं जहां होकर एक विशेष प्रकार की ट्यूब सीने के मध्यन में डाली जाती है। इससे सर्जन सीने के मध्य भाग से लिम्फानोड्स की कोशिकाओं को उठा सकते हैं। फिर इन निकाली गई कोशिकाओं और टिश्युओं की बॉयोप्सी होती है और पैथोलॉजिस्ट  कैंसर के लिए इनकी जांच करते हैं।

 

नीडल्डस बॉयोप्सी या फाइन-नीडल एस्पिरेशन (सुई से बॉयोप्सी या महीन सुई से जांच) - इस प्रक्रिया में लिम्फो नोड्स से, फेफड़ों के पिंड से या अस्थि मज्जा (बोन मैरो) या अन्य किसी अंग से जहां ट्यूमर फैला हो सकता है, तरल या टिश्युओं को जांच के लिए निकाला जाता है।

ब्रोंकोस्कोपी - एक लचीले, फाइबर-ऑप्टिक व्यूपइंग उपकरण को वायुमार्ग के ज़रिए फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। इस उपकरण से डॉक्टार सीधे फेफड़ों की जांच कर सकते हैं और परीक्षण के लिए कोशिकाऐं निकाल सकते हैं।

 

सर्जरी-कभी-कभी पहले ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है और फिर निदान किया जाता है।

 

पीईटी स्कैसनिंग- इसका उपयोग शुरूआती निदान के लिए और लंग कैंसर के फैलाव और फैलाव की सीमा का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट  द्वारा बहुत मामूली कैमिकलों का उपयोग करके कोशिकाओं की उदग्रहण क्षमता किसी शर्करा पदार्थ (ग्लूकोज़) के ज़रिए मापते हुए उनकी उपापचय गतिविधियों की जांच की जाती है। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि यदि पीईटी स्कैनिंग के साथ सीटी स्कैनिंग की जाए तो शरीर के अन्य  अंगों में कैंसर के फैलाव का पता अधिक सटीकता से लगाया जा सकता है। इस प्रकार की जानकारी मिलने से मरीज के लिए सबसे बेहतर उपचार निर्धारित करने में बहुत मदद मिलती है।

 

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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