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फेफड़े के कैंसर की चिकित्‍सा

कैंसर
By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 18, 2013
फेफड़े के  कैंसर की चिकित्‍सा

कैंसर दोबारा न हो इसलिए रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी को एक साथ किया जाता है। इस आर्टिकल में जानिए कैसे होती है लंग कैंसर की चिकित्‍सा।

लंग कैंसर के निदान के बाद उपचार का तरीका कैंसर के प्रकार और इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर कितना फैल चुका है। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर की अवस्था का निर्धारण ट्यूमर के आकार और प्रसार के क्षेत्र पर निर्भर करता है। इसके शुरूआती अवस्‍था में कैंसर के इलाज के अलग तरीके हैं।

lung cancer ki chikitsaअगर कैंसर तीसरे स्‍टेज में हैं तो उसके उपचार के लिए अलग विधि अपनायी जाती है। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर पहले स्तर वाले ट्यमर छोटे होते हैं और आस-पास के ऊतक या अंगों को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। दूसरे और तीसरे स्तर वाले ट्यूमर आस-पास के ऊतक और अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं और लसीका गांठों तक फैल जाते हैं। चौथे स्‍टेज पर ट्यूमर छाती के बाहर फैल जाते हैं।

 

[इसे भी पढ़ें : कैंसर के प्रकार]

 

लंग कैंसर की चिकित्‍सा -


सर्जरी -
यदि कैंसर छाती में है और इसके छाती के बाहर फैलने के कोई भी संकेत नहीं मिलते हैं तो ऐसे सभी नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है। इसक लिए सर्जरी इन प्रकारों का उपयोग किया जा सकता है -

  • वेज रिसेक्शन - इसमें केवल फेफड़े के छोटे से भाग को हटाया जाता है।
  • लॉबेक्टॉमी - इसके जरिए फेफड़े के एक हिस्से को हटाया जाता है।
  • न्यूमॉनेक्टॉमी - इसमें पूरे फेफड़े को सर्जरी के जरिए हटाया जाता है।



रेडिएशन थेरेपी -
इसे विकिरण चिकित्सा भी कहा जाता है, रेडिएशन थेरेपी के दो तरीके हैं -

  • एक्‍सटर्नल बीम रेडिएशन - इसके जरिए बाह्य विकिरण से प्रभावित क्षेत्र में मशीनों का उपयोग करते हुए रेडियो तरंगो के प्रभाव से आसपास के क्षेत्र में शेष परिरक्षण दिया जाता है।
  • इंटर्नल रेडिएशन - इसमें विशेष कैप्सूल या रेडियोधर्मी दवा का उपयोग कर सीधे शरीर के अंदर ट्यूमर के ऊतक के पास दिया जाता है, जो धीरे-धीरे प्रभाव करती है।

 

[इसे भी पढ़ें : कैंसर की चिकित्‍सा और उससे बचाव]

 

कीमोथेरेपी -
अक्सर लंग कैंसर का पता तब चलता है जब यह अन्‍य हिस्‍सों में फैल चुका होता है और तब सर्जरी द्वारा इसे हटाना सम्भव नहीं होता है। जब ट्यूमर काफी फैल जाता है और इसका इलाज नहीं किया जा सकता तो कैंसर की वृद्धि को धीमा करने के लिए कीमोथेरेपी की सलाह दी जाती है। कीमोथेरेपी ने लक्षणों में कमी प्रदर्शित की है और लंग कैंसर के गम्भीर मामलों में भी सर्जरी से इसका इलाज संभव हो पाया है।


कीमोथेरेपी के नये तरीके -
पिछले दशक के दौरान लंग कैंसर को बढ़ाने और फैलाने वाले कारकों को काफी हद तक समझने में सफलता प्राप्त हुई है। कोशिका द्वारा की जाने वाली बायोकैमिकल प्रतिक्रियाओं को समझते हुए वैज्ञानिकों ने ऐसी नई दवाएं विकसित की हैं जो इनमें से कुछ प्रतिक्रियाओं को रोक सकती हैं। आमतौर पर ये नई दवाएं मोलिक्युल टार्गेटेड ट्रीटमेंन्ट्स कहलाती हैं, क्योंकि ये विशेषकर लंग कैंसर की असमान्यताओं पर हमला करके उनमें सुधार करती हैं। रोचक तथ्य यह है कि अब कुछ आनुवंशिकी जांचों की मदद से यह पूर्वानुमान लगाया जा सकता है कि कौन से कैंसर सेल इन अनियमित रासायनिक रास्तों के मार्ग में आते हैं और ये नए उपचार किन लंग कैंसरों के प्रति प्रभावी हैं।

कैंसर दोबारा न हो इसलिए रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी को एक साथ किया जाता है। कैंसर का इलाज कराने के लिए चिकित्‍सक से संपर्क अवश्‍य कीजिए।

 

 


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Written by
Nachiketa Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागApr 18, 2013

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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