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पुरूष और मानसिक स्वास्थ्‍य

पुरुष स्वास्थ्य By सम्‍पादकीय विभाग , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 01, 2013
पुरूष और मानसिक स्वास्थ्‍य

हमारे समाज में पुरुष दैनिक जीवन के तनाव की वजह से कई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं, लेकिन ये अक्सर छिपे ही रहते हैं क्योंकि पुरुषों ने यह सीखा है कि उनके साथ कोई समस्या होना कमजोरी और नामर्द होने की निशानी है।

मर्दाना लगने की अधिक से अधिक कोशिश पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को दो व्यापक तरीकों से प्रभावित करती है। पहला यह पुरुषों के मन पर एक भारी तनाव पैदा कर देता है क्योंकि वे हमेशा सर्वशक्तिमत्ता की स्थिति तक पहुंचना चाहते हैं। लेकिन यह स्थिति वास्तविकता से काफी दूर है वे चाहे जो भी करें वे आदर्श से हमेशा छोटा और कम महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरुप दर्द, निराशा, उदासी, क्रोध और मानसिक बीमारियां हो जाती हैं। दूसरे, बलशाली और शक्तिशाली होने की तीव्र इच्छा पुरुषों की एक बड़ी संख्या को सामान्य भावनाओं जैसे दर्द और उदासी से असहज बना देती है क्योंकि उन्हें लगता है कि इन भावनाओं से वे जनाना दिखने लगेंगे।

इसलिए पुरुष अक्सर इन सामान्य भावनाओं को स्वीकार करने से मना कर देते हैं और उन्हें दबाने की कोशिश करते हैं और इससे मानसिक तनाव पैदा हो सकता है। यह तनाव परोक्ष रुप से हिंसा और व्यसनी पदार्थों के उपयोग के रूप में सामने आ सकता है। पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं छिपी ही रहती हैं। यहां तक कि जब पुरुष इन समस्याओं को मान भी लेते हैं तो वे किसी की मदद लेने के इच्छुक नहीं होते क्योंकि इससे उनमें इस धारणा पैदा होती है कि वह कमजोर और निर्भर हैं जो भारतीय समाज में आदर्श पुरुष की सख्त और लचीली छवि को चुनौती देती है।

 

प्रारंभिक बचप


बचपन की शुरुआत में लड़कों में संज्ञानात्मक, भावनात्मक और सामाजिक विकास का एक खास पैटर्न होता है जो उनके व्यक्तित्व और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति खतरों की संवेदनशीलता को प्रभावित करता है।

यह देखा गया है कि पुरुष शिशुओं के मूड में कई बदलाव आते हैं, अपनी भावनाओं को संभालने में कठिनाई महसूस करते हैं और बचपन से ही उन्हें शांत करना कठिन होता है। वे प्राथमिक देखभाल कर्ता की शारीरिक और भावनात्मक के उपलब्धता के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं क्योंकि वे खुद को शांत करना मुश्किल पाते हैं। युवा लड़कों में अवसादग्रस्तता का जोखिम अधिक होता है। इस अवस्था में अवसाद चिड़चिड़ेपन के रूप में प्रकट होता है। लड़का गुस्से में बदतमीजी और आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित कर सकता है।

युवा लड़के सामाजिक संपर्क में हानि से पीड़ित होने के जोखिम पर भी होते हैं। लड़कों की एक बड़ी संख्या में खराब सामाजिक संपर्क, अकेले रहना, एकांत और दोहरावदार और रुढ़िवादी रुचियों और गतिविधियों के प्रति आवेश के विकारों से पीड़ित है। स्कूल में लड़कियों की अपेक्षा लड़कों शैक्षिक और व्यवहार की समस्याएं अधिक होती हैं जिसमें निरंतर ध्यान में कठिनाई, अधिक गतिविधि और आक्रामकता शामिल हैं।

किशोरावस्था

 

 

किशोरावस्था नर बच्चे में अधिक स्वतंत्र और मुखर होने की सामाजिक-सांस्कृतिक मांगें पैदा करती है और और लड़कों की एक बड़ी संख्या इसका जवाब बड़े ही उत्साह से देती है। वे नई चुनौतियां लेते हैं और आत्म प्रभावकारिता की एक अच्छी समझ विकसित कर लेते हैं; साथियों के समूह के साथ अच्छा रिश्ता कायम करते और आपने लिंग के बारे में और अधिक जानने की कोशिश करते हैं। इसके विपरीत कुछ लड़के माता-पिता के अचानक समर्थन और देखभाल में कमी के कारण दबाव और अकेला महसूस कर सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे अप्रिय और उदास महसूस करने लगते हैं।

कभी-कभी उनकी नवीनता, पुरुषत्व और संवेदना की खोज के कारण लड़के आवेगी और जोखिम वाले व्यवहार सम्मिलित हो सकते हैं। दवाओं का हानिकारक उपयोग और प्रयोग का एक आम पैटर्न है जो कि अंततः किशोर के सामान्य विकास को नष्ट कर देता है और उन्हें कई अन्य विकारों के लिए पहले से ही तैयार कर देता है। यह उनके रिश्तों, कैरियर और स्वयं पर एक नकारात्मक दूरगामी प्रभाव डालता है।

इस स्तर पर लड़के कैरियर के विकास को लेकर अपने उपर बड़ा दबाव महसूस करते हैं। लड़कों को ये एहसास है कि उन्हें एक ऐसा कैरियर चुनना है जिसमें अच्छी तरह से भुगतान मिले और नौकरी में स्थिरता हो। इस उम्मीद को पूरा करने के लिए कई किशोर लड़के अपनी रुचि के क्षेत्रों को छोड़ कर मुख्यधारा के करियर में फिट होने का सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं। इससे वे जो कर रहे होते हैं उसमें रुचि का आभाव होता है जिससे वे अपने काम से सुखी नहीं होते और प्रदर्शन खराब हो जाता है तथा उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है।

हाल ही के वर्षों में लड़के अपनी शारीरिक छवि में अत्यधिक तल्लीन रहते हैं खासतौर...

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