दर्द के इलाज के लिए उसे समझना है जरूरी

Updated at: Dec 22, 2014
दर्द के इलाज के लिए उसे समझना है जरूरी

दर्द केवल एक अनुभूति मात्र नहीं है। यह कई परिस्थितियों का संकेत हो सकता है। दर्द किसी बड़ी बीमारी की ओर इशारा हो सकता है। इसलिए दर्द को हल्‍के में नहीं लेना चाहिये। और इसके बारे में चिकित्‍सीय परामर्श जरूर लेना चाहिये।

 Onlymyhealth Staff Writer
दर्द का प्रबंधन Written by: Onlymyhealth Staff WriterPublished at: Jul 19, 2010

दर्द वह अनुभव है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति जीवन में कभी ना कभी अनुभव करता है। दर्द शरीर का यह बताने का एक माध्यम है कि कहीं कुछ ठीक नहीं है। यह शरीर की एक प्रकार की आंतरिक चेतावनी है, जो यह बताता है कि शरीर में कोई अंग ठीक से काम नहीं कर रहा और उस पर ध्यान देने की जरूरत है। दर्द के प्रति प्रतिक्रिया दर्द की तीव्रता का विश्वसनीय संकेत नहीं है, क्योंकि अलग-अलग लोगों की दर्द सहने की क्षमता अलग-अलग होती है। कुछ लोग तीव्र दर्द को भी बिना आह भरे सह लेते हैं, जबकि दुसरे लोग साधारण दर्द में भी कराह पड़ते हैं।

 

 

दर्द क्‍या है ?

दर्द एक आसान सा शब्‍द है, लेकिन इसका अर्थ वह‍ नहीं है जो आमतौर पर लोग सोचते हैं। कई लोग अपने हाथ अथवा कमर में होने वाली तकलीफ को दर्द का नाम देते हैं। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। इसे नोसिसेप्‍शन-इलेक्‍ट्रोकेमिकल सिग्‍नल कहा जाता है। ये सिग्‍नल हमारे शरीर में चोट की प्रतिक्रिया स्‍वरूप होते हैं। संकेत हमारे नर्व फाइबर के साथ-साथ स्‍पाइनल कोर्ड से मस्तिष्‍क तक जाती हैं। और यहां यह प्रोसेस्‍ड होकर दर्द का अनुभव देते हैं।

 

दर्द का अहसास

उदाहरण के लिए, अगर आपकी उंगली में कट लग जाए, तो यह आपकी उंगली में दर्द नहीं है। यह नोसिसेप्‍शन है। लेकिन, नोसिसेप्‍शन बहुत बुरा शब्‍द माना जाता है, यह शब्‍द बोलना भी बहुत मुश्किल है। और साथ ही लोगों के लिए इसे याद रख पाना भी बहुत मुश्किल है।

दर्द एक गंभीर परिस्थिति है, जो आपको खतरे का सं‍केत देती है और साथ ही आपसे वहां से दूर हटने को भी कहती है। लेकिन जब मांसपेशियों के ठीक होने के बाद भी दर्द बना रहे, तो यह परिस्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे में दर्द आपके नर्वस सिस्‍टम में बदलाव करने लगता है।

ऐसी परिस्थिति में हमें दर्द को एक बीमारी के तौर पर लेना चाहिये। कुछ ऐसे ही जैसे आप डायबिटीज, अस्‍थमा या फिर दिल की बीमारियों को लेते हैं।


दर्द से जुड़े कुछ सामान्‍य मिथ

सिर में दर्द होना। यह बात काफी हद तक सही मानी जाने लगी है। हां, आपके मस्तिष्‍क में दर्द हो रहा है, लेकिन यह नहीं बना। जानकार मानते हैं कि दर्द के निदान के लिए उसके मूल को समझना बहुत जरूरी है। मस्तिष्‍क में दर्द के कई जोखिम कारक जैसे- तनाव, गुस्‍सा, चिंता, विश्‍वास, उम्‍मीद आदि कई कारण इसमें गहरी भूमिका अदा करते हैं।



दर्द के साथ जीना पड़ेगा


इसके अलावा एक अन्‍य मिथ यह भी है कि हमें दर्द के साथ ही जीना पड़ेगा। सबसे पहले हमें यह समझने की जरूरत है कि क्‍या दर्द के पीछे कुछ चिकित्‍सीय कारण भी हैं, जिनका इलाज किया जा सकता है। डॉक्‍टर को मरीज को यह नहीं कहना चाहिये कि आपको दर्द के साथ जीना पड़ेगा। डॉक्‍टर को यह समझाना चाहिये कि आखिर दर्द का प्रबंधन कैसे किया जाए। फिर चाहे उसके लिए दवाओं का सेवन करना पड़े, सर्जरी की जरूरत पड़े या फिर शारीरिक अथवा मानसिक थेरेपी ही क्‍यों न लेने पड़ें। ये सब मिलकर मरीज को दर्द मे आराम पहुंचाने का काम करते हैं। इसके साथ ही उसके जीवन स्‍तर और शारीरिक क्रियाकलापों में आराम पहुंचाते हैं।

दवायें दर्द का इलाज

कई बार मरीज यह समझता है कि दवायें मरीज के दर्द को खत्‍म करती हैं। लेकिन हकीकत यह है कि दवायें मरीज के दर्द को कम करने में ज्‍यादा मददगार होती हैं। लेकिन कुछ मामलों में दवाओं में रोग संशोधन के भी गुण होते हैं। हकीकत यह है कि इन दर्दनाक परिस्थितियों के लिए, अब तक विज्ञान को दर्द को दूर करने का इलाज नहीं मिला है। लेकिन, इसके प्रबंधन को लेकर हमारे पास ढेरों विकल्‍प मौजूद हैं।

 

दर्द का इलाज

क्‍या महिलाओं और पुरुषों में अलग होता है दर्द


जी, यह बात सच है। एक अनुमान के अनुसार महिलाओं को गंभीर दर्द की समस्‍या पुरुषों की अपेक्षा अधिक होती है। महिलाओं को फिब्रोमायल्‍गिया और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम होने की आशंका पुरुषों की अपेक्षा अधिक होती है। लेकिन, लगातार सिरदर्द होने की समस्‍या पुरुषों में अधिक देखी जाती है।

महिलाओं में अनुभूति से उत्‍पन्‍न दर्द होने का खतरा भी अधिक होता है। गर्मी, सर्दी, दबाव और बिजली उत्‍तेजनाओं से भी महिलाओं को अधिक दर्द होता है। लेकिन, इससे हमें यह नहीं समझना चाहिये कि महिलायें पुरुषों के मुकाबले कमजोर होती हैं। विज्ञान के अनुसार यह महिलाओं के केंद्रीय मस्तिष्‍क की संचरना के कारण होता है।

 

Image Courtesy- Getty Images

 

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