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थाइराइड जांच के तरीके

थायराइड By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Feb 13, 2013
थाइराइड जांच के तरीके

थाइराइड जांच के तरीके : थाइराइड एक साइलेंट किलर है जो शरीर को धीरे-धीरे समाप्त करता है। इसलिए थाइराइड का पता चलने पर तुरंत जांच कराकर थाइराइड का उपचार करना चाहिए। थाइराइड से ग्रस्त मरीज के लिए

थाइराइड एक सामान्य समस्या है जो कि जनसंख्या के 1 प्रतिशत लोगों में पायी जाती है। थाइराइड एक साइलेंट किलर है जो शरीर को धीरे-धीरे समाप्त करता है। इसलिए थाइराइड का पता चलने पर तुरंत जांच कराकर थाइराइड का उपचार करना चाहिए।

thyroid jaanch ke tareekeथाइराइड के फंक्शन की जांच (Thyroid Function Tests-TFTs) की जांच बहुत सामान्य है। टीएफटी की जांच सामान्य बीमारियों जैसे बुखार और थकान में भी की जाती है। थाइराइड की जांच किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह पर ही प्रयोगशाला में करवाना चाहिए।

 

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थाइराइड जांच के तरीके -


फिजियोलॉजी -
थाइराइड ग्रंथि से हाइपोथैलमस, पिट्यूटरी ग्रंथियां और थाइराइड सभी मिलकर थाइरॉक्सिन (Thyroxine-T4) और ट्राइआयोडोथाइरोनाइन (Triiiodothyronine-T3) के निर्माण में सहयोग करते हैं। थाइराइड को उकसाने वाले हार्मोन थाइराइड से टी-3 और टी-4 को छोडते हैं। थाइरॉक्सिन या टी-4 थाइराइड से‍ निकलने वाला मुख्य हार्मोन है। फिजियोलॉजी के जरिए इन हार्मोन की जांच लैब में की जाती है जिससे थाइराइड का पता लगता है। इसलिए थाइराइड की समस्या होने पर रोगी को फिजियोलॉजी करवाना चाहिए।

 

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स्क्रीनिंग -
स्क्रीनिंग के जरिए थाइराइड से ग्रस्त मरीज की पूरी तरह से पॉजिटिव जांच संभव नहीं होती है लेकिन कई मामलों में थाइराइड के मरीज के लिए स्क्रीनिंग भी फायदेमंद होती है। थाइराइड के जन्मजात मरीज और शिशुओं की स्क्रीनिंग जांच से थाइराइड का पता लग जाता है। मधुमेह रोगियों (टाइप-1 और टाइप-2) में स्क्रीइनिंग से थाइराइड की जांच संभव है। टाइप-1 मधुमेह से पीडित महिला और बच्चा होने के तीन महीने बाद महिला की स्क्रीनिंग थाइराइड के लिए की जा सकती है।



थाइराइड फंक्श न टेस्ट्स (टीएफटी) -
थाइराइड से ग्रस्त मरीज के लिए थाइराइड फंक्शन टेस्ट  (TFTs) किया जाता है। इस जांच से यह निश्चित हो जाता है कि मरीज हाइपोथाइराइड है या हाइपरथाइराइड। इसके लिए थाइराइड को उकसाने वाले हार्मोन (Thyroid Stimulating Hormone-TSH) की जांच की जाती है। 80-90 प्रतिशत मरीजों में टीएसएच सीरम ज्यादा घातक होता है। हाइपोथाइराजिड्म से ग्रस्त मरीज में टीएसएच का स्तर बढता है और हाइपरथाइराजिड्म के मरीज में टीएसएच का स्तर घटता है। टीएफटी जांच से टीएसएच सीरम की संवेदनशीलता का पता चलता है जिससे थाइराइड के मरीज का इलाज समय से पहले किया जा सकता है।

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निगरानी करके -
थाइराइड के मरीज के व्यवहार को देखकर कुछ हद तक थाइराइड की जांच की जा सकती है। प्रसव के बाद महिला के स्‍वास्‍थ्‍य को देखकर थाइराइड का पता लगाया जा सकता है। टाइप-1 मधुमेह से ग्रसित लोगों के दैनिक क्रियाकलापों को देखकर, गर्दन को हिलाने में या इधर-उधर देखने में दिक्कत होने पर, कई दिनों सामान्य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या फीवर या सर्दी-जुकाम आदि के द्वारा इसकी जांच की जा सकती है।



भागदौड भरी जिंदगी में सर दर्द, बदन दर्द और बुखार जैसी समस्याएं आम हो गईं हैं और लोग इससे जल्दी छुटकारा पाने के लिए दर्द भगाने वाली दवा खा लेते हैं जिसका साइड इफेक्ट हो सकता है। लेकिन अगर कई दिनों तक बुखार, सिरदर्द या थकान बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेकर थाइराइड की जांच कराएं। थाइराइड का पता चलने पर इसका आसानी से उपचार किया जा सकता है।

 

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