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थाइराइड का उपचार कैसे करें

थायराइड
By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Aug 24, 2012
थाइराइड का उपचार कैसे करें

थाइराइड को साइलेट किलर कहा जाता है इसलिए थाइराइट के उपचार के सही तरीके पता होने चाहिए।

thyroid ka upchaar kaise kare

थाइराइड के रोगियों में थाइराइड हार्मोन क्षमता से ज्यादा पैदा होने लगता है। थाइराइड को साइलेंट किलर भी कहा जाता है जिसके कारण मरीज की मौत भी हो सकती है। थाइराइड ग्रंथि के ठीक से काम न करने की वजह से शरीर में विभिन्न प्रकार की सामान्य स्वास्‍थ्‍य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। थकान आना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना, जुकाम होना, त्वचा सूखना, अवसाद होना, वजन बढने और हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी सामान्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। थाइराइड के उपचार के द्वारा शरीर के इन्हीं विकारों को समाप्त किया जाता है जिससे कि थाइराइड हार्मोन के संतुलन का स्तर सामान्य रहे। थाइराइड के उपचार के लिए किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।


इसे पढ़े- (थाइराइड जांच के तरीके)

थाइराइड उपचार के तरीके -


रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट -

थाइराइड के मरीज को रेडियोएक्टिव आयोडीन दवाई गोली या लिक्विड के द्वारा दिया जाता है। इस उपचार के द्वारा थाइराइड की ज्यादा सक्रिय ग्रंथि को काटकर अलग किया जाता है। इसमें जो आयोडीन दिया जाता है वह आयोडीन स्कैन से अलग होता है। रेडियोएक्टिव आयोडीन को लगातार आयोडनी स्कैन चेकअप के बाद दिया जाता है और आयोडीन हाइपरथाइराइजिड्म के पहचान की पुष्टि करता है। रेडियोएक्टिव आयोडीन थाइराइड की कोशिकाओं को समाप्त करते हैं। इस थेरेपी से शरीर को कोई भी साइड-इफेक्ट नहीं होता है। रेडियोएक्टिव आयोडीन 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में भी सुरक्षित तरीके से प्रयोग किया जा सकता है। प्रेग्नेंसी में रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट का इलाज नहीं किया जाता है इससे मां और बच्चे को नुकसान हो सकता है। दिल के मरीजों के लिए यह उपचार बहुत ही सुरक्षित होता है। इस थेरेपी से 8-12 महीने में थाइराइड की समस्या समाप्त हो जाती है। सामान्यतया 80 प्रतिशत तक थाइराइड के मरीजों को रेडियोएक्टिव आयोडीन के एक ही खुराक से उपचार हो जाता है। लेकिन थाइराइड की समस्या गंभीर होने पर इसके इलाज में कम से कम 6 महीने तक लग सकते हैं।



सर्जरी -

सर्जरी के द्वारा आंशिक रूप से थाइराइड ग्रंथि को निकाल दिया जाता है, जो कि बहुत सामान्य तरीका है। थाइराइड के मरीजों में सर्जरी के द्वारा उसके शरीर से थाइराइड के ऊतकों को निकाला जाता है जो कि ज्यादा मात्रा में थाइराइड के हार्मोन पैदा करते हैं। लेकिन सर्जरी से आसपास के ऊतकों पर भी प्रभाव पडता है। इसके अलावा मुंह की नसें और चार अन्य। ग्रंथियां (जिनको पैराथाइराइड ग्रंथि कहते हैं) भी प्रभावित होती हैं जो कि शरीर में कैल्शियम स्तर को नियमित करती हैं। थाइराइड की सर्जरी उन मरीजों को करानी चाहिए जिनको खाना निगलने में दिक्कत हो रही हो और सांस लेने में दिक्कत हो। प्रग्नेंट महिला और बच्चे जो कि थाइराइड की दवाइयों को बर्दास्त नहीं कर सकते हैं उनके लिए सर्जरी उपयोगी है।



एंटीथाइराइड गोलियां -

थाइराइड में सामान्य समस्याएं जैसे बुखार, गले में ख्रास जैसी समस्याएं होती हैं। यह छोटी समस्याएं थाइराड की वजह से हो सकती हैं इसलिए दवाईयां लेने से पहले जांच करानी चाहिए। थाइराइड के मरीज को चिकित्सक से सलाह लेकर एंटीथाइराइड की गोलियां खानी चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीथाइराइड की गोलियां आपके लिए हानिकारक हो सकती हैं।



स्व्स्थ खान-पान अपना कर थाइराइड के खतरे को कम किया जा सकता है। इसलिए अपने डाइट प्लान में थाइराइड के लिए उपयोगी आहार को शामिल कीजिए।

Written by
Nachiketa Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागAug 24, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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