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डायबिटीज़ और डायबिटिक न्यूरोपैथी का दर्द

दर्द का प्रबंधन By सम्‍पादकीय विभाग , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Jan 01, 2013
डायबिटीज़ और डायबिटिक न्यूरोपैथी का दर्द

डायबेटिक न्यूरोपैथिक दर्द

 

डायबिटीज से समय के साथ डायबेटिक न्यूरोपैथी या पूरे शरीर की नर्व को नुकसान हो सकता है। नर्व की क्षति से शरीर की कई प्रणालियों, जैसे-पाचन तंत्र, प्रजनन तंत्र आदि को भी नुकसान पहुंच सकता है। डायबेटिक न्यूरोपैथी के रोगी को इसके चरम् स्थिति में दर्द, संवेदनहीनता या अतिसंवेदनशीलता का अनुभव हो भी सकता है औऱ नहीं भी। उम्र बढने, मोटापा, लंबे समय तक डायबिटीज रहने और अनियंत्रित ब्लड सुगर से डायबेटिक न्यूरोपैथी का खतरा बढ सकता है।

 

कारण

 

डायबेटिक न्यूरोपैथी का सही कारण ज्ञात नहीं है। नर्व को क्षति कई कारणों से पहुंच सकती है, जैसे-

  • उपापचय से संबंधित कारणः जैसे-ब्लड ग्लुकोज का बढना, डायबिटीज की अवधि, असामान्य ब्लड कोलेस्टेरोल औऱ दूसरे लिपिड का स्तर, औऱ संभवतः इंसुलिन का निम्न स्तर।
  • न्यूरोवैस्कुलर कारणः रक्त नलिकाओं की क्षति, जो नर्व्स को ऑक्सीजन और दूसरे पोषक तत्व की आपूर्ति करते हैं।
  • स्वतःप्रतिरक्षक तथ्य जो नर्व्स में सूजन पैदा कर सकते हैं।
  • कार्यप्रणाली से संबंधित तथ्य, जैसे-कार्पेल टनेल सिंड्रोम, जिससे नर्व्स को चोट पहुंच सकती है
  • वंशानुगत विशेषताएं नर्व रोगों की संभावना बढा सकती है
  • जीवनशैली से जुड़े तथ्य, जैसे-धुम्रपान, अल्कोहल लेना, और ऐसी जीवनशैली-जिसमें देर तक बैठे रहना पड़ता हो।

 

लक्षण

 

डायबेटिक न्यूरोपैथी से सर्वाधिक प्रभाव पैरों पर पड़ता है। डायबेटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी के लक्षण हैं-

  • दर्दः एंठन, तेज दर्द, जलन, झुनझुनी औऱ छूने पर दर्द।
  • झुनझुनी
  • संवेदनहीनता(गंभीर या दीर्घकालिक सुन्नपन)
  • जलन(खासकर शाम में)

दर्द और दूसरे लक्षण रात में बढ जाते हैं। पांव के नर्व में क्षति होने पर पांव संवेदनशून्य हो जाते हैं, जिसकी वजह से चोट लगने पर पता नहीं चलता। इसलिए त्वचा और पैरों की देखभाल आवश्यक है। डायबेटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी के प्रारंभिक लक्षणों वाले रोगी को ब्लड सुगर पर नियंत्रण रखने से दर्द से राहत मिल सकता है।

 

जांच और रोग की पहचान

 

डायबेटिक न्यूरोपैथी की पहचान के लिए, डॉक्टर आपके लक्षणों और शारीरिक परीक्षण जिसमें ब्लडप्रेशर, हार्ट बीट, मसल् एंड्यूरेंस और रिफ्लेक्स का सहारा लेते हैं। विभिन्न प्रकार की गतिविधियों, जैसे-कंपन, तापमान बदलने और स्पर्श, के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया का निरीक्षण किया जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार मधुमेह पीड़ित सभी लोगों को साल में एक बार पैरों का विस्तृत परीक्षण करवाना चाहिए, ताकि पेरीफेरल न्यूरोपैथी का पता लगाया जा सके।

आपके डॉक्टर इन जांचों की सलाह दे सकता है-

  • नर्व कंडक्शन का अध्ययन या इलेक्ट्रोमायोग्राफीः इस जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि नर्व का किस प्रकार का और कितना नुकसान हुआ है। इस जांच से नर्व की कार्यक्षमता और प्रतिक्रिया का भी पता लगाया जा सकता है।
  • हार्टरेट वैरिएबीलिटि-इस जांच से पता चलता है कि गहरी सांस लेने, रक्तचाप के बढने या घटने औऱ पोश्चर से आपका हृदय किस प्रकार प्रभावित होता है।
  • अल्ट्रासाउंड- अल्ट्रासाउंड आंतरिक अंगों जैसे-आंत, ब्लैडर और यूरीनरी ट्रैक्ट के दूसरे भागों की जांच के लिए प्रयोग में लाए जाते हैं।

उपचार

 

डॉक्टर डायबेटिक न्यूरोपैथी का इलाज प्रायः ओरल ड्रग्स के द्वारा करते हैं। इसके लिए कोई एक ऐसी दवा नहीं है जो प्रत्येक रोगी के लिए लाभकारी हो। कुछ लोगों में वैकल्पिक इलाज से लाभ होता है जबकि अधिकतर लोगों को प्रायः कई प्रकार के इलाज के संय़ोजन की आवश्यकता होती है।

 

दवाएं-

  • एसिटामिनोफेन या नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं- दर्द से आराम के लिए एसिटामिनोफेन या एनएसआइडी जैसे-आइब्यूप्रोफेन, डिक्लोफिनैक, नैप्रोक्सेन, इत्यादि लिए जा सकते हैं।
  • एनएसआइडी से दर्द से राहत मिलती है, लेकिन कुछ लोगों में अधिक समय तक इसके उपयोग से किडनी की कार्यक्षमता घटती है।
  • ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट(टीसीए) जैसे इमिप्रेमाइन, एमिट्रिप्टिलीन और नॉरट्रिप्टिलीन न्यूरोपैथिक दर्द के लिए प्रभावकारी है। दर्दनिवारण के लिए अवसाद की तुलना में टीसीए की अत्यल्प मात्रा दी जाती है। पेरीफेरल न्यूरोपैथी के दर्द के लिए सबसे ज्यादा दी जाने वाली टीसीए दवा है-एमिट्रिप्टिलीन।
  • सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअपटेक इनहिबिटर(एसएसआरआई)-एसएसआरआई...
Written by
सम्‍पादकीय विभाग
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागJan 01, 2013

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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