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चीनी खाएं लेकिन संभलकर

स्वस्थ आहार By अन्‍य , सखी / Jul 28, 2010
चीनी खाएं लेकिन संभलकर

चीनी चींटियों को ही नहीं, बीमारियों को भी दावत देती है। मीठा खाने से तमाम बीमारियों समेत डायबिटीज और मोटापा बढने की बात कही जाती है। अमेरिका की कार्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. डेविड लेविट्स्की के अनुसार शर्करायुक्त भोजन स्वादिष्ट लगता है। इ

चीनी चींटियों को ही नहीं, बीमारियों को भी दावत देती है। मीठा खाने से तमाम बीमारियों समेत डायबिटीज और मोटापा बढने की बात कही जाती है। अमेरिका की कार्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. डेविड लेविट्स्की के अनुसार शर्करायुक्त भोजन स्वादिष्ट लगता है। इसलिए मीठे पदार्थ ज्यादा खा लिए जाते हैं।

1. डायबिटीज होने का मतलब है कि आपका शरीर पूरी तरह खून से ग्लूकोज साफ नहीं कर पा रहा। शरीर में ग्लूकोज का नियमन ठीक से न हो पाने की स्थिति में यह टिश्यूज (ऊतकों) को नष्ट कर सकता है। टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में यह बीमारी जन्म से होती है। इसका शर्करा से कोई संबंध नहीं होता। इसी तरह टाइप 2 डायबिटीज मोटापे के चलते होती है।

2. पुराने शोधों में कहा जाता था कि फ्रुक्टोज (फल शर्करा) को सामान्य रूप से लिया जाए तो खून में वसा का स्तर नहीं बढता। हाल ही में मिनेसोटा यूनिवर्सिटी के शोध में बताया गया है कि प्रिजर्वेटिव उत्पादों द्वारा ली जाने वाली फ्रुक्टोज की मात्रा खून में जमकर वसा बढाती है। हम जितना फ्रुक्टोज खाते हैं, लिवर उसमें मौजूद ग्लूकोज को खून में भेजता या जमा कर देता है। संचय भंडार भरने के बावजूद लिवर, फ्रुक्टोज को खून में न भेजकर ग्लाइकोजन के रूप में जमा कर लेता है।

3. सामान्यत: डायबिटीज या प्रीडायबिटीज के लिए डॉक्टर ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (ओजीटीटी) करते हैं। इस टेस्ट से शर्करा का तंत्र पर दबाव आंका जाता है। शोध के मुताबिक किसी सामान्य मीठे पेय में ग्लूकोज की अल्प मात्रा (75 ग्राम) भी तंत्र पर दबाव डालती है।

4. लंबा जीवन जीने के लिए अनाजों के सेवन के अलावा संयमित रहने की जरूरत है। शोध अनुसार रक्त शर्करा का कम स्तर भी आपकी जिंदगी लंबी कर सकता है।

जीवन बढाना हो तो..

प्रतिदिन टेलीविजन देखने के घंटे यदि अधिक हो रहे हैं तो आपके जीने के घंटे कम हो रहे हैं। क्योंकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का मानना है कि इससे कार्डियो वेस्क्युलर डिजीज होने का खतरा होता है।

एक घंटा रोज टी.वी. देखने से कई कारणों से मरने की दर 11 प्रतिशत बढ जाती है। 9 प्रतिशत कैंसर से मृत्यु तथा सीवीडी (कार्डियो वेस्क्युलर डिजीज) का खतरा 18 प्रतिशत है। जो लोग 4 घंटे टी. वी. देखते हैं उनकी मृत्यु दर 40 प्रतिशत तक हो जाती है तथा इसमें भी कार्डियो वेस्क्युलर का खतरा 80 प्रतिशत बढ जाता है। दरअसल मानव शरीर की संरचना ऐसी है कि उसे लगातार हरकत करते रहना है, जम कर बैठना नहीं है। ज्यादा देर तक डेस्क या कंप्यूटर के सामने बैठना सेहत के लिए हानिकर हो सकता है। बैठे रहने से मेटाबॉलिज्म ओर ओबेसिटी का संतुलन बिगडने के कारण रोग होते हैं।

अब ग्रीन टी की बारी..

ग्रीन टी पीकर न सिर्फआप तरो-ताजा महसूस करते हैं, बल्कि ये आपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। यह कैमेलिया साइनेंसिस की पत्तियों को सुखाकर तैयार की जाती है। जानिए ग्रीन टी के गुण :

1. प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत: इसमें मौजूद विटमिन सी, पॉलीफिनॉल्स के अलावा अन्य एंटीआक्सीडेंट शरीर के फ्री रेडीकल्स को नष्ट कर प्रतिरक्षा तंत्र सुदृढ बनाता है। दिन में तीन से चार कप ग्रीन टी शरीर में 300-400 मि.ग्राम पॉलीफिनॉल पहुंचाती है, जो रोग-मुक्त रखने में बेहद मददगार है।

2. कैंसर रखे दूर: ग्रीन टी कैंसर सेल बढने से रोकती है। इसके नियमित प्रयोग से पाचन नली और मूत्राशय के कैंसर की आशंका न के बराबर रहती है।

3.स्वस्थ हृदय: उबाल कर पीने वाली चाय की तुलना में ग्रीन टी वसा बढने की दर नियंत्रित करती है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी संतुलित रहती है। रक्तचाप सामान्य रहता है। ये खून को पतला बनाए रखती है जिससे ब्लड में थक्का नहीं बन पाता। इसको पीने से स्ट्रोक की आशंका भी कम रहती है।

4. वजन संतुलित: भोजन के बाद एक कप ग्रीन टी पाचन की गति बढा देती है। इसमें मौजूद कैफीन से कैलरी खर्च करने की गति भी बढ जाती है। वजन संतुलित रखने में मदद मिलती है।

काम जब बन जाए बोझ

ऑफिस में लगातार काम और टेंशन। ऐसे में थकान का होना लाजिमी है। थकान दूर कर खुद को तरो-ताजा बनाने के लिए जरूरी है कि काम से आप कुछ दिनों का ब्रेक लें। इसके अलावा खुद को रिफ्रेश करने के लिए आप ये नुस्खे भी अपना सकते हैं:

1. ऑफिस में काम के दौरान थोडा धूप में टहल आएं। सूर्य की किरणों से मिलने वाला विटमिन डी शरीर में सेरेटोनिन नामक रसायन का स्तर बढाता है। सेरेटोनिन अच्छी नींद लाने में मददगार होता है।

2. अगर आपका ऑफिस दूसरी या तीसरी मंजिल पर है तो लिफ्ट की जगह सीढियों का प्रयोग करें। इससे न केवल आपकी कसरत की जरूरत पूरी होगी, बल्कि शरीर में ऊर्जा का स्तर भी बढेगा।

3. मानसिक थकान होने की स्थिति में कोई क्रॉसवर्ड या पजल हल करें। इससे आप रिलैक्स्ड रहेंगे। थकावट होने पर दिमाग पर जोर डालने की बात भले ही अजीब लगे, लेकिन कोशिश जरूर करें।

4. लगातार काम के बीच में कुछ मिनट अपनी पसंद की कोई किताब पढें। इससे भी आपका मूड फ्रेश होगा।

5. पैदल चलने से बेहतर कोई व्यायाम नहीं है। इससे आप तरो-ताजा और ऊर्जावान महसूस करेंगे।

6. अधिक लाभ के लिए आप अरोमा थेरेपी का भी सहारा ले सकते हैं।

पैनिक अटैक अलार्म

अचानक डर, दिल का जोर से धडकना तथा सांस लेने में दिक्कत होना जैसे लक्षण को पैनिक अटैक की श्रेणी में रखा गया है। छाती में दर्द की शिकायत लेकर आने वाले 25 प्रतिशत मरीज पैनिक अटैक से ग्रस्त होते हैं। इसके लक्षण दिल के दौरे के समान लगते हैं। एस्कॉटर््स हार्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के कार्डियोलॉजिस्ट पद्मश्री उपेंद्र कौल का कहना है कि चिंता या घबराहट हृदय व हृदय रक्त वाहिका प्रणाली पर बुरे प्रभाव डाल सकती है। जैसे दिल की धमनियों में सिकुडन, रक्त के जमा होने की प्रवृत्ति बढने और हृदय धडकन की ताल में गडबडी। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अलार्म की तरह है। युवाओं में जीवनशैली की अनियमितता के कारण तेजी से बढ रहा है।

छोटी है पर बडे काम की..

मूंगफली को गरीबों की मेवा के रूप में जाना जाता है। जो बादाम और काजू का सेवन नहीं कर सकते उनके लिए प्रोटीन से भरपूर तथा पौष्टिक पदार्थ है मूंगफली।

1. मूंगफली को उबाल कर खाने से कच्ची या भुनी मूंगफली की तुलना में बीमारियों से लडने वाले फाइटोकेमिकल्स चार गुना बढ जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि उबालने से मूंगफली के छिलके में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स उसके बीजों में जज्ब हो जाते हैं। ऐसा मानना है अलाबामा ए एंड एम यूनिवर्सिटी के आहार विशेषज्ञों का।

मेडिकल उपकरण से खतरा

आजकल कई तरह के मेडिकल उपकरण बाजार में उपलब्ध हैं। बीमारी जानने के लिए डॉक्टर इन उपकरणों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने बताया कि इन मेडिकल उपकरणों के मेटल नैनोपार्टिकल्स के सिग्नल शरीर की कोशिकाओं के भीतर मौजूद डीएनए को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। शोधकर्ताओं ने पहले लैब में इंसानी कोशिकाओं की लेयर विकसित की जो सामान्य कोशिकाओं से करीब तीन गुनी मोटी थी। इस पर नैनोपार्टिकल्स के प्रभाव का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं का मानना था कि नैनोपार्टिकल्स में इतनी ताकत होती है कि वे दूर से भी इंसानी शरीर के बायोलॉजिकल सिग्नल्स को प्रभावित कर डीएनए को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक साजो-सामान, सनस्क्रीन लोशन, कॉस्मेटिक्स, टेक्सटाइल फाइबर्स तथा ड्रग करियर या इमेजिंग एजेंट्स के तौर पर बायोमेडिकल प्रयोगों में जम कर हो रहा है।

 

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