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चिंता से डायबिटीज का खतरा

डायबिटीज़ By अन्‍य , दैनिक जागरण / Dec 28, 2010
चिंता से डायबिटीज का खतरा

लंदन, एजेंसी : कहावत है- चिंता चिता समान। अब इस कहावत पर वैज्ञानिकों की भी मुहर लग गई है। शोध से साबित हुआ है कि चिंता करने वाले लोगों को डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है। यह तो जगजाहिर है कि डायबिटीज कई गंभीर बीमारियों की जड़ है।

लंदन, एजेंसी : कहावत है- चिंता चिता समान। अब इस कहावत पर वैज्ञानिकों की भी मुहर लग गई है। शोध से साबित हुआ है कि चिंता करने वाले लोगों को डायबिटीज का खतरा ज्यादा रहता है। यह तो जगजाहिर है कि डायबिटीज कई गंभीर बीमारियों की जड़ है।


स्वीडन स्थित कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने पाया कि तनाव, अवसाद और रात को नींद नहीं आने की समस्या पुरुषों में डायबिटीज (टाइप टू, जो आम तौर पर 90 फीसदी मरीजों को होता है) होने का खतरा दोगुने से भी अधिक बढ़ा देती है। इस अध्ययन के तहत शोधकर्ताओं ने वर्ष 1938 से 1957 के बीच जन्म लेने वाले 2,127 लोगों का अध्ययन किया। उन लोगों ने 3100 महिलाओं को भी अध्ययन के दायरे में रखा, लेकिन महिलाओं में तनाव और दुख का डायबिटीज से इस तरह का कोई संबंध नहीं पाया गया।

 

शोध के दौरान व्यक्ति को डायबिटीज का मरीज बनाने के लिए जिम्मेदार कई और कारणों का पता चला। इनमें उम्र, बाडी मास इंडेक्स (शरीर की लंबाई की तुलना में वजन), डायबिटीज होने का पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान, शारीरिक क्रियाशीलता और सामाजिक- आर्थिक पृष्ठभूमि आदि शामिल हैं।

 

इस अध्ययन दल के प्रमुख कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर एंडर्स एकबोम का कहना है कि चिंता और डायबिटीज बीच सीधा संबंध है। चिंता या मनोवैज्ञानिक दुख दिमाग के उन हिस्सों को प्रभावित करता है, जो हारमोन्स के नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसा शायद इस कारण से होता है कि अवसाद व्यक्ति के भोजन और शारीरिक क्रियाशीलता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा कि तनाव और अवसाद तो पहले से ही हृदय रोग होने के कारण के रूप में जाने जाते थे। इसका सबसे अधिक खतरा पुरुषों को ही होता है महिलाओं को नहीं। आखिर ऐसा क्यों होता है? इस बारे में प्रो. एकबोम का कहना है कि ऐसा संभवत: महिलाओं व पुरुषों द्वारा किसी चीज को अपनाने के तरीके में अंतर के कारण होता है। महिलाएं अपने तनाव और दुख का अहसास दूसरों के साथ बांट लेती हैं, जबकि पुरुष अमूमन ऐसा नहीं करते। वे इससे उबरने के लिए शराब, ड्रग्स आदि का सहारा लेने लगते हैं।

 

इंग्लैंड में डायबिटीज शोध के निदेशक डा. लेन फ्रेम ने कहा कि महिला व पुरुषों को अलग-अलग खतरा होने के पीछे कारणों का और विस्तार से पता लगाने के लिए गहन शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शुरुआती शोध के परिणामों से ऐसा लगता है कि यह अंतर हार्मोनल या व्यवहारिक प्रभाव के कारण पाया जाता है।

 

 

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