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गर्भाकालीन मधुमेह से कैसे निपटें

गर्भावस्‍था By लक्ष्मण सिंह , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 15, 2012
गर्भाकालीन मधुमेह से कैसे निपटें

जिन महिलाओं की उम्र 35 वर्ष से अधिक है या उनका वजन ज्‍यादा है या उनका कोई पारिवारिक इतिहास है तो ऐसी महिलाओं को अपनी गर्भावधि म‍धुमेह की जांच समय से पहली करानी चाहिए।

गर्भाकालीन मधुमेह गर्भावस्था में एक अस्थायी रोग का माना जाता है। ऐसे में गर्भवती महिला का शरीर रक्‍त शर्करा से जूझने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में इन्‍सुलिन का निर्माण करने में असमर्थ होता है।

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गर्भावस्था में महिला की गर्भाकालीन मधुमेह के लिए जांच होती है, और जिनकी उम्र 35 वर्ष या इससे अधिक होती है या जिनका वजन आवश्यकता से अधिक होता है या जिनके परिवार में मधुमेह का इतिहास चलता आ रहा है, उनकी जांच समय से पहले और नियमित रूप से करानी चाहिए।

गर्भाकालीन मधुमेह के संकेत

  • रक्‍त में शर्करा
  • थोड़ी-थोड़ी देर में पेशाब आना
  • थकावट महसूस होना
  • मितली का अहसास होना
  • मूत्राशय, योनी और त्वचा का संक्रामित होना
  • आंखों से धुंधला दिखाई देना


लगभग दो से पांच फीसदी गर्भवती महिलाएं गर्भाकालीन मधुमेह से ग्रसित हो सकती हैं। इसकी जांच गर्भावस्था के 24वें और 28वें हफ्ते के बीच में की जाती है। अधिकांश मामलों में गर्भावधि मधुमेह महिला के साथ ही उसके गर्भ में पल रहे शिशु पर असर डालता है। इसके बावजूद भी आप अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव कर इनके खतरों से बच सकती हैं।

रक्‍त शर्करा को नियंत्रण में रखें

नियमित रूप से अपने रक्‍त की जांच कराकर खुद को स्वस्थ रखने की कोशिश करें। आप अपने रक्‍त की एक बूंद से भी रक्‍त शर्करा का परीक्षण करा सकती हैं। बाजार में दवाइयों की दुकान पर रक्‍त की जांच करने की किट भी मिलती है।

संतुलित आहार का सेवन करें

इस डायटिंग की करने की कोशिश न करें, अपने आहार के बारे में विशेषज्ञ से परामर्श करें। कार्बोहाइड्रेट के सेवन पर नियंत्रण रखें, कार्बोहाइड्रेट रक्‍त शर्करा को बढ़ाता है। खाना पकाने के स्वास्थ्यकार तरीके अपनाएं, जैसे कि भूनना, भाप से पकाना, और माइक्रोवेव से खाना पकाने की प्रक्रिया इत्यादि। चर्बी युक्‍त और शक्कर युक्‍त आहार के सेवन से बचें।

हल्‍का व्‍यायाम करें

किसी विशेषज्ञ के नेतृत्व में हल्‍का व्‍यायाम करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इससे आपका वजन भी नियंत्रण में रखें। हालांकि गर्भावस्‍था के दौरान वजन बढ़ना जारी रहता है। आपको अपने वजन की हर हफ्ते जांच करानी चाहिए।
अपने चिकित्सक से गर्भावस्था में उपयुक्त व्यायाम के बारे में जान लें।

गर्भकालीन मधुमेह का प्रबंधन करने के लिए कई गर्भवती महिलाओं को इन्‍सुलिन लेने की जरूरत पड़ती है। यदि आपको भी इन्‍सुलिन इन्‍जेक्‍शन की जरूरत पड़ती है, तो आपका चिकित्सक इस पर निगरानी रखेगा। कुछ महिलाओं को यह जानने के लिए कि उनके शरीर में पर्याप्‍त मात्रा में ग्‍लूकोज है या नहीं मूत्र जांच कराने की भी जरूरत पड़ती है।

प्रसव के बाद आपकी रक्‍त शर्करा का स्तर सामान्‍य पर लौट आएगा। प्रसव के छह माह बाद भी आपको अपनी रक्‍त शर्करा की जांच कराने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद भी यदि आप गर्भाकालीन मधुमेह से ग्रसित हैं और अगर आप दोबारा गर्भ धारण करना चाहती हैं, तो बेहतर होगा कि आप गर्भ धारण करने से तीन माह पहले अपनी रक्‍त शर्करा की जांच करा लें। समय रहते गर्भकालीन मधुमेह का उपचार न कराने पर-

  • पैदा होने वाले बच्‍चे का वजन ज्‍यादा हो सकता है।
  • प्रसव के समय पूर्व होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • नॉर्मल डिलीवरी की बजाय सिजेरियन के संयोग बढ़ जाते हैं।


सही और सामयिक उपचार से, गर्भकालीन मधुमेह से ग्रसित महिलाएं स्वस्थ सुंदर बच्चे को जन्म दे सकती हैं और प्रसव के बाद गर्भाकालीन मधुमेह भी गायब हो जाता है।





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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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