गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण

    गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण

    आइए जानें गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण क्या हैं और गर्भावस्था में क्षय रोग क्यों होता हैं।

    महिलाओं में क्षय रोग पुरूषों के मुकाबले बहुत कम होता है, लेकिन ऐसा भी कुछ निश्चित नहीं है। हालांकि बड़ी उम्र की महिलाओं की जगह कम उम्र की महिलाओं यानी की युवतियों को टी.बी.होने का खतरा अधिक रहता है। दरअसल आजकल की लाइफ स्टाइल और खान-पान से महिलाओं का इम्यून सिस्टम बहुत मजबूत नहीं हो पाता जिससे वे जल्दी बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। सिर्फ युवा महिलाएं ही नहीं बल्कि मां बनने वाली महिलाएं यानी कि गर्भवती महिलाएं भी टी.बी.से अछूती नहीं हैं। क्या आप जानते हैं गर्भावस्था के दौरान टी.बी होने से महिलाओं को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि गर्भावस्था के दौरान टी.बी होने के क्या कारण हैं, गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण क्या हैं। तो फिर आइए जानें गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण क्या हैं और गर्भावस्था में क्षय रोग क्यों होता हैं।



    गर्भवती महिलाओं में क्षय रोग के लक्षण

    • गर्भवती महिलाओं में भी क्षय रोग के लक्षण लगभग वहीं होते हैं जो एक सामान्य महिला में होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं गर्भवती महिलाओं को टी.बी.के दौरान अधिक समस्याएं होने लगती हैं।
    • गर्भावस्था के दौरान क्षयरोग के लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी होता है हालांकि टी.बी.के लक्षणों को पहचान पाना थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि गर्भावस्था में टी.बी.के कोई खास लक्षण नहीं होते।
    • शारीरिक परिवर्तन- कई बार टी.बी के दौरान गर्भावस्था में कई शारीरिक बदलाव हो सकते हैं। जिससे गर्भवती महिला को कई अन्य शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं।
    • थकान होना- गर्भावस्था के दौरान टी.बी.होने से गर्भवती महिला को थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद थकान होने लगती हैं।
    • सांस संबंधी समस्याएं होना- गर्भावस्था में टी.बी.के कारण महिला को सांस संबंधी समस्याएं हो जाती हैं। इतना ही नहीं टी.बी.के कारण थोड़ा सा चलते ही या फिर सिर्फ सीढि़या चढ़ने पर  गर्भवती महिलाओं की सांस फूलने लगती हैं।
    • फेफड़ों संबंधी समस्याएं होना- गर्भावस्था के दौरान टी.बी.होने पर फेफड़ों संबंधी समस्याएं होना आम बात है। दरअसल, टी.बी.होने पर सबसे अधिक प्रभाव और सबसे पहले फेफड़ों पर ही प्रभाव पड़ता है।
    • कफ होना- गर्भवती महिला को तपेदिक होने पर सामान्य महिला की तुलना में तपेदिक के होने वाली कफ की समस्या भी बहुत अधिक होती है। दरअसल दवाईयों और फिर टी.बी.दोनों साइड इफेक्टव के कारण भी गर्भावस्था में अधिक कफ जमने लगता हैं।
    • वजन का कम होना- आमतौर पर गर्भावस्‍था के दौरान वजन बढ़ता है लेकिन यदि गर्भावस्था में टी.बी.हो जाए तो गर्भवती महिला का वजन कम होने लगता है और महिला द्वारा लिए जाने वाले पौष्टिक आहार का भी कुछ खास असर नहीं पड़ता।
    • फेफड़ों में सूजन आना- गर्भावस्था में टी.बी.के कारण कई बार फेफड़ों में सूजन आने जैसी समस्याएं भी महिला को होने लगती हैं।
    • बुखार होना- गर्भावस्था में आमतौर पर भी यदि महिला कमजोर है तो बुखार की समस्या हो सकती है लेकिन गर्भावस्था में टी.बी.होने पर बुखार नियमित रूप से रहता है। हालांकि कई बार ये घटता-बढ़ता रहता है।
    • घबराहट होना, चक्कर आना, सिर दर्द होना, पसीने आना, कंधे व पसलियों में दर्द की शिकायत ये सभी लक्षण गर्भवती महिलाओं को टी.बी. के दौरान होने लगते हैं।

     
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