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    क्षय रोग के जोखिम कारक

    ट्यूबरकुलोसिस By अनुराधा गोयल , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 19, 2012
    क्षय रोग के जोखिम कारक

    आइए जानें क्षय रोग के जोखिम कारकों के बारे में।

    Chhay rog k jhokhim karakयह तो सभी जानते हैं क्षयरोग के गंभीर दुष्प्रभाव शरीर पर बहुत पड़ते हैं, इतना ही नहीं टी.बी से कई और गंभीर बीमारियां भी होने का खतरा बराबर बना रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं तपेदिक के आपको कई तरह के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। लेकिन सवाल ये उठता है कि क्षय रोग के जोखिम कारक क्या हैं। क्षय रोग से शरीर को क्या-क्या नुकसान पहुंच सकता हैं। इसके साथ ही ट्यूबरकुलोसिस के नकारात्मक प्रभाव क्या-क्या हो सकते हैं। टी.बी के खतरे तो बहुत होते हैं लेकिन उनमें से कुछ खतरे बहुत आम होते हैं और कुछ ऐसे जो कि टी.बी बढ़ने पर ही होते हैं। लेकिन कई बार कुछ कारण ऐसे भी हैं जिनसे टी.बी.जैसी बीमारी बढ़ जाती है। तो आइए जानें क्षय रोग के जोखिम कारकों के बारे में।



    क्षय रोग के जोखिम कारक



    प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना-
    इम्युन सिस्टम कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं, आपका आनुवांशिक रूप से कमजोर होना। ठीक से खान-पान ना लेना। क्या आप जानते हैं टी.बी आमतौर पर उन लोगों को अपनी चपेट में लेता है जिनका इम्युन सिस्टम कमजोर होता है।



    वृद्घावस्था– वृद्घावस्था एक ऐसी स्टेज है जब बीमारियां होनी शुरू हो जाती है। ऐसे में मधुमेह, कैंसर जैसी बीमारियां होना आम बात है। क्या आप जानते हैं वृद्घावस्था में टी.बी.का खतरा दुगुना हो जाता है।



    धूम्रपान और मादक पदार्थों का सेवन-कुछ लोग मादक पदार्थों के सेवन के बहुत आदी होते हैं खासकर युवा वर्ग। ऐसे में इम्युन सिस्टम कमजोर होना या फिर बीमारियां लगना आम बात है। जो लोग जरूरत से ज्यादा धूम्रपान और एल्कोहल का सेवन करते हैं उन्हें  टी.बी.का खतरा सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले दुगुना हो जाता हैं।



    व्यक्ति का जन्म स्थान –
    टी.बी होने का यह महत्वपूर्ण कारक है। दरअसल टी.बी का खतरा उन लोगों को भी अधिक होता है जो तपेदिक प्रभावित क्षेत्र में रह रहे होते हैं। यानी यदि आपका देश टी.बी प्रभावित है तो आपको भी टी.बी होने का खतरा बढ़ जाता हैं।



    संक्रमित लोगों के संपर्क में आने से- यदि आपके घर में या आसपास के क्षेत्र में कोई टी.बी पीडि़त व्यक्ति हैं तो भी आपको टी.बी हो सकता है। यानी आपके आसपास टी.बी.के जीवाणु मौजूद हैं जो आपको सावधानी ना बरतने पर कभी भी अपनी चपेट में ले सकते हैं।



    शारीरिक रूप से कमजोर होना या बीमार रहना-कुछ लोग बहुत कमजोर होते हैं तो कोई किन्हीं कारणों से किसी लंबी बीमारी का शिकार हो जाता हैं। ऐसे में भी आपको टी.बी हो सकता है। दरअसल हवा में मौजूद टी.बी.के कण कमजोर लोगों को जल्दी ही अपना शिकार बना लेते हैं।



    डायबिटीज, एड्स जैसी बीमारी होना- यदि आप डायबिटीज खासकर डायबिटीज टाइप 2 के शिकार हैं तो आप कभी भी टी.बी की चपेट में आ सकते हैं। सामान्य व्यक्तियों की तुलना में टी.बी. उन लोगों को अधिक होता है जा मधुमेह के शिकार हैं। ठीक ऐसे ही एचआईवी एड्स से पीडि़त लोग भी बहुत जल्दी ही टी.बी. की चपेट में आ सकते हैं।



    अधिक यात्रा करने पर-यदि आप बहुत अधिक यात्रा करते हैं और अनजाने में आप ऐसे क्षेत्र में भी जाते हैं जो कि टी.बी.प्रभावित क्षेत्र है तो भी आप टी.बी.की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। इसीलिए ट्रैवल के दौरान सोच समझ कर जाना चाहिए।

     
    Disclaimer:

    इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।