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क्रोंचासन क्या है

योगा By Nachiketa Sharma , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Mar 19, 2012
क्रोंचासन क्या है

क्रोंचासन को सारस मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है।

 

क्रोंचासन को सारस मुद्रा के नाम से भी जाना जाता है। संस्कृत में सारस को क्रोंच कहते हैं। इस आसन में आगे की उठी हुई टांग सारस के गर्दन की तरह दिखाई देती है। इस आसन के प्रत्येक दिन अभ्यास करने से पीठ में लचीलापन आता है। इस आसन से कूल्हों (हिप्स) और हैमस्टिंग्स  (घुटने के पीछे की नस) में रक्तसंचार अच्छे से होता है। क्रोंचासन की मुद्रा पश्चिमोत्तासन की तरह होती है लेकिन यह उससे अलग है। इस आसन को करने से जांघों की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है इसलिए इस आसन को करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

 
क्रोंचासन का अभ्यास करने की विधि –

  • पैरों को सामने की तरफ सीधा करके जमीन पर चटाई बिछकार बैठ जाइए। उसके बाद अपने दाहिने पैर को मोडते हुए पीछे की तरफ ले जाकर कूल्हों के नीचे दबा दीजिए। ध्यान रखें की आपके पैर का अगला हिस्सा जांघों के नीचेन हो।
  • इसके बाद अपने हाथों से बाएं पैर के तलुए को पकडकर ऊपर की तरफ उठाइए। अगर आपका हाथ पैर के तलुए तक न पहुंच पाए तो योगा बेल्ट का प्रयोग किया जा सकता है।
  • अब बाएं पैर को बिना दबाव के जितना ऊपर की ओर उठा सकते हैं उठाइए। इस बात का ध्यान रहे कि आपका पीठ और सिर झुके हुए न हों, गर्दन और पीठ सीधे होने चाहिए।
  • अपने बाएं पैर को सिर के पास तक लाने की कोशिश कीजिए।
  • आराम से धीरे-धीरे और गहरी सांस लेते हुए इस मुद्रा में कम से कम 30 सेकेंड तक रहिए।
  • उसके बाद धीरे-धीरे ऊपर उठे बाएं पैर को छोडते हुए आराम से नीचे की तरफ ले जाइए।
  • आसन की इस मुद्रा को दूसरे पैर से भी कीजिए।

 

क्रोंचासन के अभ्यास से लाभ –

  • जिनके पैर फ्लैट होते हैं उनके लिए इस आसन का अभ्यास बहुत ही फायदेमंद होता है।
  • पेट फूलने और पेट में गैस बनने की बीमारी का इस आसन से उपचार किया जा सकता है।
  • क्रोंचासन दिल और पेट के अंगों को उत्तेजित करता है।
  • पीठ, कमर और जांघ के पीछे की नसों ( हैमस्टिंग्स ) का खिंचाव होने से लचीलापन आता है और रक्त संचार ठीक से होता है।

क्रोंचासन का अभ्यास करते वक्त सावधानियां -


योगासनों में क्रोंचासन का अभ्यास बहुत ही कठिन मुद्रा है। इस आसन को एक बार में नहीं किया जा सकता है कई बार के अभ्यास से यह आसन आसानी से किया जा सकता है। शुरूआत में इस आसन का अभ्यास करने के लिए हाथों की बजाय योगा बेल्ट का प्रयोग करना चाहिए। छोटी रस्सी का प्रयोग करने से बचें क्योंकि रस्सी से पैर के एक निश्चित स्थान पर दबाव बनता है जिससे दर्द हो सकता है। क्रोंचासन में जांघ की मांसपेशियों का खिंचाव होता है इसलिए अगर घुटने और टखने में किसी भी प्रकार की दिक्कत हो तो इस आसन का अभ्यास करने से बचें। महिलाओं को मासिक धर्म आ रहा हो तो यह आसन ना करें।

 

Written by
Nachiketa Sharma
Source: ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभागMar 19, 2012

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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