कोलोरेक्टल कैंसर का निदान

Updated at: Apr 22, 2013
कोलोरेक्टल कैंसर का निदान

कोलोरेक्टल कैंसर का निदान : कोलोरेक्‍टल कैंसर के निदान के लिए चिकित्सक अक्सर सिग्माइडोस्कोपी या कोलनोस्कोपी की मदद से इस कैंसर का पता लगाने की कोशिश करते हैं। आइए जानें कोलोरक्‍टल कैंसर के निदान के लिए कौन से टेस्‍टों

Pooja Sinha
कैंसरWritten by: Pooja SinhaPublished at: Apr 17, 2013

कोलोरेक्‍टल कैंसर के निदान के लिए चिकित्सक अक्सर सिग्माइडोस्कोपी या कोलनोस्कोपी की मदद से इस कैंसर का पता लगाने की कोशिश करते हैं।

 

colorectal cancer ka nidaanसिग्माइडोस्कोपी या कोलनोस्कोपी के इस जांच में चिकित्सक एक लचीले दिखने वाले ट्यूब को मरीज़ के कोलन और रेक्टम में डालकर पालिप्स का पता लगाने के लिए कैंसर के सेल्स की जांच करता है। आइए जानें कोलोरक्‍टल कैंसर के निदान के लिए कौन से टेस्‍टों को अपनाया जाता हैं।

 

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कंप्‍यूटेड टोमोग्राफी (सी टी) स्कैन

कंप्‍यूटेड टोमोग्राफी (सी टी) स्कैन से कभी–कभी कोलन में हो रही असामान्यता का पता चलता है। हाल में हुए शोधों में स्‍टूल के सैंपल की जांच से कोलन कैंसर के विशिष्ट आनुवंशिक दोषों का पता चला है। स्‍टूल में ब्‍लड का टेस्‍ट सामान्य तरीके से होता है और कोलन कैंसर के लिए सिर्फ यही एक जांच काफी नहीं होती।

 

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कभी–कभी अगर कैंसर कोलन या रेक्टम के बाहर फैल जाता है, तो आपको उस जगह की बायोप्सी कराने की आवश्यकता होती है। बायोप्सी के दौरान एक‍ चिकित्सक या सर्जन टिश्यू के एक छोटे भाग को निकाल कर उसका टेस्‍ट प्रयोगशाला में करता है।

इस कैंसर में और भी कई प्रकार के टेस्‍ट होते है आइए जानें उन टेस्‍टों के बारे में।

 

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दूसरी सम्भव जांच

  • पेट का सी टी स्कैन या कंप्‍यूटेड टोमोग्राफी।
  • रेक्टम के कैंसर के टेस्‍ट के साथ ही एण्डोरेक्टल अल्ट्रासाउन्ड स्कैन।
  • कैंसर का पता लगने के बाद सम्पूर्ण शारीरिक परीक्षण और सीने का एक्स–रे जिससे कैंसर के फैलने का पता चल सके।
  • ब्‍लड टेस्‍ट का उद्देश्य होता है कार्सिनोएम्ब्रायोनिक एन्टीजन के स्तर का पता लगाना जो कि कोलन कैंसर के मरीज़ों में सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होता है।
  • ब्‍लड टेस्‍ट से भी यह पता लग सकता है कि आपका लिवर कितने अच्छे तरीके से काम करता है क्योंकि कोलन कैंसर अक्सर लिवर के रास्ते फैलता है।

 

 

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