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एसोफैगल कैंसर का निदान

Updated at: Apr 08, 2013
कैंसर
Written by: Anubha TripathiPublished at: Apr 08, 2013
एसोफैगल कैंसर का निदान

एसोफैगल कैंसर का निदान: जानें कैसे होता है एसोफैगल कैंसर का निदान। 

esophageal cancer ka nidaan

शारीरिक जांच और चिकित्सकीय इतिहास की पड़ताल के बाद डॉक्टर संभवत: रोगी के सीने का एक्स-रे और दूसरी नैदानिक जांच कराएगा। यह निम्न हो सकती हैं:

 
सामान्य प्रयोगशाला जांच

रक्त के प्रमुख परीक्षणों(टेस्ट्स) से रोगी में खून की कमी और आपके अंगों (यकृत, गुर्दे आदि) के सामान्य कामकाज का पता चल सकता है। इन परीक्षणों(टेस्ट्स) से डॉक्टर को रोगी की दशा की गंभीरता और दूसरी जांच की जरूरत तय करने में भी मदद मिल सकती है।

 
बेरियम निगलना

इसे एसोफैग्राम के रूप में भी जाना जाता है, यह टेस्ट एसोफैगस का एक्स–रे है। रोगी को  बेरियम मिला तरल पिलाया जाएगा जिसकी परत रोगी के एसोफेगस के आंतरिक हिस्से पर रूक जाती है और एक्स–रे में एसोफेगल नली में कोई रूकावट या आकार में बदलाव जानना आसान हो जाता है।

 

[इसे भी पढ़ें: एसोफैगल कैंसर क्या है]

एसोफैगोस्कोपी

इसमें डॉक्टर एंडोस्कोप नाम की एक पतली, हल्की नली रोगी के एसोफेगस में डालेगा। एंडोस्कोप के सिरे पर छोटा वीडियो जिसमें कैमरा होता है। इस उपकरण से डॉक्टर रोगी के एसोफेगस की समस्याएं देख सकता है और परीक्षण के लिए टिश्यूज़ के नमूने भी एकत्र कर सकता है। इसमें एसोफेगस की बॉयोप्सी या एंडोस्कोपी उपयोग के दौरान देखे गए संदिग्ध हिस्सों में बारीक सुई चुभाना शामिल किया जा सकता है। प्राय: इसमें रोगी के होने वाली परेशानी दूर करने के लिए उसे कोई उपशामक (सीडेटिव) या दर्दनिवारक दवा दी जाती है।

कंप्‍यूटेड टोमोग्राफी

रोगी के आंतरिक अंगों के त्रिविमीय(थ्री-डाइमेंशनल) चित्र लेने के लिए अलग-अलग कोणों से एक्स–रे चित्र लिए जाते हैं। इस टेस्ट‍ में किसी पिंड या रूकावट की पड़ताल की जाती है और कैंसर की सीमा और इसके फैलाव को जानने में खासतौर से उपयोगी है जो उपचार के फैसलों में भी सहायक हो सकता है।

[इसे भी पढ़ें: एसोफैगल कैंसर के कारण]

 

एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड

इस टेस्ट में ध्वनि तरंगों से चित्र बनाने के लिए एक छोटी सी अल्ट्रासाउंड मशीन का उपयोग रोगी  के एसोफेगस में प्रवेश कराई जाने वाली एक ट्यूब के सिरे पर किया जाता है। यह टेस्ट यह निर्धारित करने में सीटी स्कैन से बेहतर साबित हो सकता है कि एसोफेगस में और आसपास के टिश्युओं और लिम्फ नोड्स में कैंसर कहां तक फैल चुका है। सर्जरी का फैसला करने और योजना बनाने में यह जानकारी बहुत कारगर साबित होती है। एसोफेगल कैंसर वाले मरीजों की जांच का यह बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ सामान्यतया संदिग्ध क्षेत्र में एक बारीक सुई भी घुसाई जाती है।


पीईटी स्कैनिंग

पीईटी स्कैनिंग एक महत्वपूर्ण नई तकनीक है, जिसे एसोफेगल कैंसर के फैलाव की सीमा जानने में उपयोग किया जाता है। असामान्य कैंसर कोशिकाओं का एक शर्करा पदार्थ (ग्लूकोज) कर ग्रहण क्षमता पहचानते हुए बहुत मामूली प्रभाव वाले रसायनों (केमिकल्स) के प्रयोग से इन कोशिकाओं की उपापचय गतिविधियां इस टेस्ट से जांची जाती हैं। पीईटी स्कैनिंग के साथ सीटी स्कैनिंग किए जाने से शरीर के दूसरे हिस्सों में कैंसर का फैलाव बहुत सटीक ढंग से जाना जा सकता है ऐसा हाल के अध्ययनों से पता चला है। इससे मिलने वाली जानकारियों से मरीज हेतु उपचार निर्धारित करने में बहुत ज्यादा मदद मिलती है।

 

एसोफैगस के स्क्‍वामस सेल कार्सिनोमा वाले मरीजों में मुंह, गले, फेफड़ों और पेट के कैंसर बनने के जोखिम काफी ज्यादा होते हैं। इस वजह से आपको संभवत: सीने के एक्स–रे और सीने के सीटी स्कैन के साथ गले और फेफड़ों के अंदर से एंडोस्कोपिक टेस्ट भी कराने पड़ सकते हैं।

 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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