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एलज़ाइमर डीज़ीज़

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य By जया शुक्‍ला , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग / Apr 25, 2011
एलज़ाइमर डीज़ीज़

एलज़ाइमर याददाश्‍त से जुड़ी सबसे भयानक विकार है।

एलज़ाइमर डीज़ीज़एलज़ाइमर डीज़ीज़ जैसा विकार 65 वर्ष तक की आयु के लगभग 8 से 16 प्रतिशत लोगों में पाया जाता है। यह दिमाग से जुड़ा सबसे भयानक विकार है क्योंकि यह याद्दाश्त को धीरे-धीरे और कठोर रूप से प्रभावित करता है। इस बीमारी के लक्षणों का पता काम करने के तरीके में और भाषा में परिवर्तन होने के साथ लगता है। व्यक्ति के व्यावहारिक लक्षण कुछ इस प्रकार परिवर्तित होते हैं जैसे मानसिकता में बदलाव, गुस्सा आना ,अवसाद से ग्रसित होना ।


बायलाजिकल मार्कर्स की कमी की वजह से इस बीमारी का पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी का पता बायोप्सी और आटोप्सी से चलता है। एलज़ाइमर डीज़ीज़ के कई दूसरे कारणों से भी हो सकता हैं जैसे- पार्किन्सन डीज़ीज़ ,ब्रेन ट्यूमर , हन्टिंगटन डिजी़ज़ ,सबड्यूरल हीमैटोमा , हाईपरथायरायडिज्म, विटामिन बी 12 और फालिक एसिड की कमी।

 

एलज़ाइमर डीज़ीज़ के मरीज़ों के व्यावहारिक लक्षण:

 

  • एलज़ाइमर के मरीज़ों की याद्दाश्त धीरे-धीरे कमज़ोर होती जाती है।
  • याद्दाश्त का ठीक तरीके से ना काम कर पाना और भाषा का ठीक प्रकार से प्रयोग ना कर पाना भी इस बीमारी के लक्षण हैं ।
  • बीमारी के शुरूवाती दिनों मे अवसाद होना भी इस बीमारी का बहुत ही आम लक्षण है।
  • हालांकि अवसाद का पता मरीज को जल्दी नहीं लग पाता ।
  • बीमारी की आगे की स्थितियों में मरीज़ उत्तेजित रहता है।

 

यह बीमारी बहुत से दूसरे लक्षणों से जुड़ी है जैसे साइकोसिस, डीप्रेशन, उत्तेजना। दूसरे व्यावहारिक लक्षण है इन्सोमनिया, आपत्तिजनक मौखिक बातें बोलना, सेक्स से जुड़ी समस्याएं होना। हालांकि इस बीमारी का पता लगाने के लिए मरीज़ के व्यवहारिक लक्षण ही काफी नहीं होते हैं।


एलज़ाइमर के 10 से 25 प्रतिशत मरीज़ हैल्युसिनेशन के शिकार होते हैं।
30 से 50 प्रतिशत मरीज़ डिल्यूज़न का शिकार होते हैं और 40 से 50 प्रतिशत मरीज़ अवसाद के शिकार होते हैं।
वह मरीज़ जिनमें मानसिक बीमारी जैसे विकार होते हैं उन्हे डिमेंशिया का भी खतरा रहता है और ऐसे मरीज़ अकसर अवसाद और कुंठा से परेशान रहते हैं, उनका व्यवहार और व्यक्तित्व परिवर्तित होता रहता है और यहां तक कि वह अपना ख्याल भी ठीक तरीके से नहीं रख पाते।

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