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इंटरनेट के जंजाल में उलझ रहा बालमन

परवरिश के तरीके By अन्‍य , दैनिक जागरण / Nov 23, 2010
इंटरनेट के जंजाल में उलझ रहा बालमन

इंटरनेट बच्चों के लिए लत बन रहा है। महानगरों में रहने वाले सात से 11 साल तक की उम्र के लाखों बच्चे प्रतिदिन औसतन पांच घंटे से अधिक समय इंटरनेट पर बिताते हैं।

 

इंटरनेट बच्चों के लिए लत बन रहा है। महानगरों में रहने वाले सात से 11 साल तक की उम्र के लाखों बच्चे प्रतिदिन औसतन पांच घंटे से अधिक समय इंटरनेट पर बिताते हैं। एक अध्ययन में बात सामने आई है। चिकित्सकों ने बच्चों की इस लत के प्रति अभिभावकों को आगाह किया है।


देश के चार महानगरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलूर और चेन्नई) में एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसोचैम) के हालिया सर्वे में बच्चों को लग रही इंटरनेट की लत के बारे में नए तथ्य सामने आए हैं।


शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव सूरी कहते हैं, 'सूचना प्रौद्योगिकी सीखना और उससे मित्रता करना गलत नहीं है, लेकिन बेहद कम उम्र में यह शौक घातक हो सकता है। लगातार कंप्यूटर का स्क्रीन देखने से आंखों पर जोर पड़ता है। नजर कमजोर होती है। ऐसे में सिर में दर्द की शिकायत हो सकती है। काफी देर तक कुर्सी पर बैठने से पीठ में तकलीफ हो सकती है।'


डॉक्टरों के अनुसार, कम उम्र में हुईं यह तकलीफें आगे जा कर बड़ा रूप ले सकती हैं। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि सात साल से 11 साल की उम्र के 52 फीसदी बच्चे रोजाना औसतन पांच घंटे नेट सर्फिंग करते हैं। जबकि 12 से 15 साल तक के 58 फीसदी बच्चों को इंटरनेट अन्य किसी काम से कहीं अधिक प्यारा है।


क्या करते हैं बच्चे : सर्वे की मानें तो नेट पर ये बच्चे चैटिंग करते हैं और गेम खेलते हैं। ऐसे बच्चों की संख्या कम है, जो पढ़ाई संबंधी मदद के लिए नेट इस्तेमाल करते हैं।


मनोचिकित्सक डॉ. समीर पारिख कहते हैं, 'शहरीकरण से यह समस्या पैदा हुई है क्योंकि अगर बच्चे के माता-पिता दोनों ही नौकरी करते हैं, तो ऐसे में बच्चे को लंबे समय तक अकेले रहना पड़ता है। फिर समय बिताने के लिए उसे इंटरनेट के रूप में एक दोस्त मिल जाता है।'


हाल ही में लंदन स्थित टानटन स्कूल के प्रमुख जॉन न्यूटन ने एक अध्ययन के बाद कहा कि फेसबुक, ट्विटर और बेबो जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स बच्चों के नैतिक विकास के लिए खतरा बन रही हैं क्योंकि इनके जरिए बच्चे झूठ बोलना और दूसरों को अपमानित करना सीख रहे हैं।


डॉ. पारिख कहते हैं कि ऐसे बच्चों को अपने बड़ों के मार्गदर्शन की जरूरत है ताकि वे बेहूदा चीजों और तथ्यों में फर्क कर सकें।

 

Written by
अन्‍य
Source: दैनिक जागरणNov 23, 2010

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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