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अब डेंगू की जांच दूसरे ही दिन

डेंगू By अन्‍य , दैनिक जागरण / Apr 25, 2018
अब डेंगू की जांच दूसरे ही दिन

रोजाना बढ़ रहे डेंगू के मामलों के बीच एक राहत भरी खबर है। अब इसके मरीज और उनका इलाज कर रहे डॉक्टर पांच से छह दिन तक अंधेरे में नहीं रहेंगे।

mosquito in skin एनआईवी ने अब तक की सबसे सटीक तकनीक विकसित की

  • दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में लिए जा रहे नमूने
  • पहचान में देरी की वजह से होती हैं ज्यादातर मौतें

 

रोजाना बढ़ रहे डेंगू के मामलों के बीच एक राहत भरी खबर है। अब इसके मरीज और उनका इलाज कर रहे डॉक्टर पांच से छह दिन तक अंधेरे में नहीं रहेंगे। बल्कि संक्रमण के 14 घंटे के अंदर लिए गए नमूने में भी इसके वायरस आसानी से पकड़ में आ जाएंगे। पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) की मदद से अब प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रीयल टाइम पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) तकनीक से इन मामलों की जांच की जा सकेगी। प्रारंभिक चरण के तौर पर दिल्ली के कुछ सरकारी अस्पतालों में इसे शुरू कर दिया गया है। जल्दी ही इसे व्यापक स्तर पर उपलब्ध करवाया जाएगा।

 

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक विश्व मोहन कटोच बताते हैं कि यह जांच अब तक की सबसे सटीक और संवेदनशील जांच है। डेंगू के इसी मौसम में इसे व्यापक स्तर पर शुरू कर दिया जाना है। कोशिश है कि दिल्ली के बाद देश भर से ऐसे नमूनों की रीयल टाइम पीसीआर जांच उपलब्ध हो सके। इस समय लिए जा रहे नमूने दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) की केंद्रीय प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं।

 

एनसीडीसी की एक वरिष्ठ चिकित्सा वैज्ञानिक बताती हैं कि अब तक डेंगू का पता लगाने के लिए आम तौर पर एलिजा जांच का ही सहारा लिया जाता रहा है। लेकिन इस जांच के जरिए शुरुआती पांच से छह दिन तक इसके संक्रमण का पता नहीं लग पता। जबकि रीयल टाइम पीसीआर के जरिए डेंगू के सभी चारों सीरोटाइप का सटीक पता बहुत जल्दी लग जाता है। अब एनसीडीसी में नमूने आने के आठ घंटे के अंदर इसके नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।

 

डेंगू के मामलों में उसके डॉक्टरी परीक्षण के साथ ही वायरस विशेष के एंटीबॉडी की पहचान भी जरूरी होती है। इसलिए जांच की यह तकनीक सुलभ होने के बाद डेंगू का कहर निश्चित तौर पर बहुत हद तक काबू में होगा। जानकार बताते हैं कि बुखार के सभी मामलों में पहले 14 घंटे के अंदर नमूनों को रीयल टाइम पीसीआर जांच के लिए भेजे जाने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन कुछ मरीज ऐसे होते हैं, जिनमें डेंगू का पता देर से लगने पर इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसे मामलों में यह उनकी जान बचाने में सबसे बड़ा मददगार साबित होगा।

 

एलिजा टेस्ट

एलिजा टेस्ट में एंटीबॉडीज और एंटिजेन का पता लगता है जो खून में वायरस के पहुंचने और उस पर शरीर की प्रतिक्रिया के बाद पकड़ में आते हैं। डेंगू टेस्ट के लिए एलिजा रीडर मशीन में डेंगू की एक किट लगाई जाती है। इस एक किट से एक बार में डेंगू के 70-90 सैंपलों की टेस्टिंग की जा सकती है।

 

पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर)

पॉलिमरेज़ चेन प्रतिक्रिया, डीएनए के संवर्धन के लिए प्रयोग की जाने वाली एक प्रक्रिया है। इसके लिए एक डीएनए प्राइमर एवं टॉक पॉलिमरेज की आवश्यकता होती है। इसके लिए प्रयोग किया जाने वाला उपकरण थर्मोसाइकिलर होता है। पीसीआर संक्रमण के बाद और यहां तक कि रोग की शुरुआत से पहले वायरस का पता लगाने में सक्षम है।


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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

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